छह दशक बाद भी अधूरा रेलवे का सपना, उपरेड़ा में आज भी मौजूद हैं पुराने सर्वे प्वाइंट , आखिरकार कब होगा यह सपना पूरा ?
रेलवे सर्वे के करीब 6 दशक बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई, ग्रामीणों ने पुराने सर्वे की स्थिति स्पष्ट करने की उठाई मांग
भीलवाड़ा/बनेड़ा :राजकुमार गोयल , 18 अगस्त 2026 क्षेत्र में रेलवे लाइन की लंबे समय से चली आ रही मांग और करीब छह दशक पूर्व किए गए कथित रेलवे सर्वे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बनेड़ा क्षेत्र के उपरेड़ा गांव में आज भी जमीन पर मौजूद सर्वे प्वाइंट पुराने रेलवे सर्वे की गवाही देते नजर आ रहे हैं। स्थानीय निवासी मुबारिक हुसैन मंसूरी द्वारा साझा किए गए वीडियो और दी गई जानकारी के अनुसार, रेलवे अधिकारियों ने वर्षों पूर्व क्षेत्र में रेलवे लाइन के लिए सर्वे किया था तथा मौके पर दो प्वाइंट बनाए गए थे।
खातनखेड़ी रोड पर आज भी मौजूद हैं सर्वे प्वाइंट
स्थानीय निवासी मुबारिक हुसैन मंसूरी के अनुसार, उपरेड़ा के खातनखेड़ी रोड पर एनिकट के समीप रेलवे सर्वे के दौरान एक प्वाइंट बनाया गया था। इसके करीब 100 फीट की दूरी पर दूसरा प्वाइंट भी मौजूद बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उस समय रेलवे लाइन आने की उम्मीद जगी थी, लेकिन सर्वे के बाद परियोजना को लेकर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
छह दशक बाद भी ग्रामीणों को इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार, सर्वे के बाद रेलवे परियोजना किस स्तर तक पहुंची, इसका स्पष्ट विवरण आज तक स्थानीय लोगों के सामने नहीं आया। मौके पर मौजूद पुराने सर्वे प्वाइंट अब भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कभी रेलवे लाइन के लिए बाकायदा सर्वे हुआ था, तो संबंधित विभाग को उसके रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
पिछले पांच वर्षों से लगातार पत्राचार का दावा
मुबारिक हुसैन मंसूरी ने समाचार पत्र को जानकारी देते हुए बताया कि क्षेत्र में नवीन रेलवे मार्ग निकाले जाने की मांग को लेकर पिछले करीब पांच वर्षों से रेलवे मंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल को सैकड़ों पत्राचार किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि इसके बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
बुजुर्गों के अनुसार प्रस्तावित मार्ग से जुड़ी थी उम्मीद
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, पुराने समय में प्रस्तावित रेलवे मार्ग सवाई माधोपुर से उनियारा, टोंक, शाहपुरा, उपरेड़ा, मेगरास, लांबिया स्टेशन, हरिपुरा, करेड़ा होते हुए देवगढ़-राजसमंद क्षेत्र तक जाने की चर्चा थी। ग्रामीणों का दावा है कि यदि यह रेलमार्ग अस्तित्व में आता तो क्षेत्र के अनेक गांवों को रेल सुविधा से जोड़ा जा सकता था तथा आवागमन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलता।
हालांकि, इस पुराने प्रस्ताव, सर्वे की वास्तविक आधिकारिक स्थिति और प्रस्तावित रेलमार्ग के दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित रेलवे विभाग के रिकॉर्ड से ही हो सकेगी।
सड़क किनारे मिला क्षतिग्रस्त ढांचा भी बना सवाल
साझा किए गए वीडियो में सड़क किनारे एक क्षतिग्रस्त सीमेंट का ढांचा भी दिखाई देता है। स्थानीय स्तर पर इसे लेकर भी चर्चाएं हैं कि यह ढांचा किस कार्य के लिए बनाया गया था। हालांकि, उपलब्ध वीडियो के आधार पर इसके रेलवे सर्वे से संबंध होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब रेलवे विभाग से जवाब की उम्मीद
ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे विभाग पुराने सर्वे का रिकॉर्ड सामने लाकर यह स्पष्ट करे कि छह दशक पूर्व किए गए सर्वे के बाद प्रस्ताव किस स्तर तक पहुंचा था और उसे आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया। साथ ही क्षेत्र में वर्तमान समय में किसी नए रेलमार्ग की संभावना या सर्वे की स्थिति भी स्पष्ट की जाए।
अब सवाल यही है कि उपरेड़ा में आज भी मौजूद पुराने सर्वे प्वाइंट किस रेलवे योजना की निशानी हैं और छह दशक के लंबे इंतजार के बाद इस प्रस्ताव का क्या हुआ? ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग पुराने रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने रखेगा।
— राजकुमार गोयल
भीलवाड़ा तरंग न्यूज़
Bhilwara, Bhilwara | Aug 18, 2026