कृष्ण ग्रोवर गाजियाबाद के रहने वाले हैं। कभी वह सिर्फ 3,500 रुपये की नौकरी करते थे। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत में जोरदार तरक्की की। फिर अचानक अपना काम करने की चाहत में जमी-जमाई जॉब छोड़ दी। पत्नी की सेविंग से उन्होंने अपनी उद्यमिता का सफर शुरू किया। उनके स्टार्टअप वेंचर का नाम 'हेराल्ड ई-बाइक' (Herald E-Bike) है। आज यह ब्रांड छोटे शहरों में सस्टेनेबल मोबिलिटी का मजबूत प्रतीक बन चुका है। करीब 1.5 करोड़ रुपये के मंथली रन-रेट (MRR) के साथ यह वेंचर वित्त वर्ष 2026-27 तक 20 करोड़ रुपये के सालाना टारगेट की ओर बढ़ रहा है। आइए, यहां कृष्ण ग्रोवर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
कृष्ण ग्रोवर गाजियाबाद से हैं। सिर्फ 13 साल की उम्र में उनके सिर पर से पिता का साया उठ गया था। ऐसे में उन्होंने कम उम्र से ही आत्मनिर्भर बनना सीख लिया था। साल 2005 में ग्रोवर ने 3,500 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत की। इसके बाद 2014 तक एक अंतरराष्ट्रीय बीपीओ में मैनेजमेंट पोस्ट हासिल कर ली। हा�
Korba, Korba | Oct 4, 2026