धनवार प्रखंड में सरकारी व्यवस्था पर सवाल, छह माह से खराब चापाकल; आवेदन के दो माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
धनवार प्रखंड क्षेत्र में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के सरकारी दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसका एक उदाहरण एक गांव के सार्वजनिक मंदिर परिसर में लगा चापाकल है, जो पिछले करीब छह महीने से खराब पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, इसकी मरम्मत के लिए पहले पंचायत के मुखिया से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
इसके बाद ग्रामीणों ने प्रखंड कार्यालय के संबंधित विभाग को लिखित आवेदन देकर चापाकल की मरम्मत कराने की मांग की। बताया गया कि इस संबंध में 06 जून 2026 को आवेदन दिया गया था। लेकिन 12 अगस्त 2026 तक, यानी करीब दो माह छह दिन बीत जाने के बावजूद चापाकल की मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर में सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल होने वाला चापाकल खराब रहने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और आसपास के ग्रामीणों को पानी के लिए दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक गांव के आम और अंतिम व्यक्ति के लिए एक खराब चापाकल की मरम्मत कराने में महीनों लग रहे हैं, तो प्रखंड स्तर पर विकास की बड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन किस गति से होता होगा? ग्रामीणों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से मामले में संज्ञान लेकर तत्काल चापाकल की मरम्मत कराने तथा आवेदन पर अब तक कार्रवाई नहीं होने की वजह स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही संबंधित जलापूर्ति/पीएचईडी विभाग के अधिकारियों से भी जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा, जब गांव के अंतिम व्यक्ति की छोटी से छोटी बुनियादी जरूरत का भी समय पर समाधान हो। एक सार्वजनिक चापाकल की मरम्मत के लिए महीनों तक आवेदन लंबित रहना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।