➡️ सागर में क्रिप्स (CRISP) की सुहास (SUHAAS) परियोजना का आगाज़: देवरी और केसली ब्लॉक से शुरू होगा गैर-संचारी बीमारियों का घर-घर स्क्रीनिंग अभियान
जिले में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) एवं मधुमेह (डायबिटीज) जैसी गैर-संचारी बीमारियों (NCD) की समय पर पहचान, रोकथाम और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज (CRISP) द्वारा मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालित सुहास (SUHAAS) परियोजना सागर जिले में शुरू की जाएगी। जिले के देवरी और केसली विकासखंड को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयनित किया गया है।
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मंगलवार 13 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट के एनआईसी कक्ष में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में क्रिस्प के संस्थापक सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री राधेश्याम जुलानिया तथा परियोजना के सलाहकार श्री मनोहर अगनानी ने स्वास्थ्य विभाग, आजीविका मिशन, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), महिला एवं बाल विकास के अधिकारियों को परियोजना की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।
➡️ 'Know Your Family' और 'Know Your Population' अभियान के तहत होगा घर-घर स्वास्थ्य सर्वे
श्री राधेश्याम जुलानिया ने कहा कि जिले के देवरी और केसली विकासखंड पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह की दीदियाँ, आशा कार्यकर्ता एवं सीएचओ संयुक्त रूप से 'Know Your Family' और 'Know Your Population' अभियान संचालित करेंगे। इसके तहत प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर घर-घर परिवार के सदस्यों की आभा आईडी बनवाई जाएगी, स्वास्थ्य सर्वे एवं स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई भी परिवार इस अभियान से वंचित नहीं रहना चाहिए। लेकिन प्रत्येक परिवार की स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से पूरी की जाएगी।
➡️ 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की होगी स्क्रीनिंग
परियोजना सलाहकार श्री मनोहर अगनानी ने बताया कि SUHAAS परियोजना के अंतर्गत 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप की जांच की जाएगी। स्क्रीनिंग के दौरान चिन्हित सभी हितग्राहियों का विवरण एनसीडी (NCD) पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, ताकि उनका नियमित फॉलोअप और उपचार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप एक साईलेंस किलर है। अत: 30 वर्ष से अधिक की आयु के सभी लोगों को इसकी नियमित रूप से जांच करना चाहिए और नियमित दवायें लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह रोग के जब तक लक्षण पता चलते हैं तब बहुत देर हो चुकी होती है। अत: परीक्षण ही एक ऐंसा माध्यम है जिससे इन रोगों का पता अपनी प्रारंभिक अवस्था में लगाया जा सकता है। अभियान के दौरान लोगों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, तंबाकू एवं नशे से दूरी तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
➡️ मुरैना, बालाघाट के बाद अब सागर में होगा विस्तार
कार्यशाला में बताया गया कि मध्यप्रदेश में SUHAAS परियोजना का सफल संचालन मुरैना और बालाघाट जिले में किया गया है। इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसका विस्तार सागर जिले में किया जा रहा है। परियोजना की शुरुआत देवरी और केसली विकासखंड से होगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से जिले के अन्य विकासखंडों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।
➡️ सभी विभागों के समन्वय से चलेगा अभियान
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, आशा कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं स्वयं सहायता समूह की दीदियाँ आपसी समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करें। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक लोगों की समय पर स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-संचारी रोगों की शीघ्र पहचान कर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सके और लोगों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाया जा सके।
कार्यशाला में संयुक्त कलेक्टर श्री रवीश श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटैरिया, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग से बीएमओ, सीएचओ, आजीविका मिशन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
➡️ परियोजना का मुख्य उद्देश्य और पृष्ठभूमि
ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-संचारी रोगों (NCDs जैसे ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर) का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे निपटने के लिए SUHAAS प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा गया है। शुरुआती फील्ड वर्क से यह सामने आया है कि वर्तमान व्यवस्था में कई कमियां हैं और बीमारी का पता चलने के बाद भी इलाज जारी रखने की दर 25% से कम है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए SUHAAS प्रोजेक्ट स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं की क्षमता का विकास करेगा ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ा सकें और इन बीमारियों के फैलाव को रोक सकें। इस मॉडल का मूल विचार बेहद सरल और प्रभावी है—जब गांव के परिवारों को स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाओं (विशेष रूप से उनके पड़ोसियों और रिश्तेदारों) के बीच बांट दिया जाएगा, तो स्वास्थ्य की निगरानी एक परिचित और भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा की जाएगी। यह आपसी विश्वास समय पर बीमारी की जांच कराने, नियमित दवा खाने और स्वस्थ आदतें अपनाने में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के अकेले प्रयासों से कहीं अधिक बेहतर परिणाम देगा। संक्षेप में, यह प्रोजेक्ट दो मुख्य मोर्चों पर काम करेगा—पहला, NCD पोर्टल के डेटा की बुनियादी कमियों को सुधारना और दूसरा, समुदाय के स्तर पर एक मजबूत फॉलो-अप सिस्टम तैयार करना।
➡️ प्रस्तावित गतिविधियाँ और चरण (Sequence of Activities)
चरण 1 (उप-स्वास्थ्य केंद्रों की पहचान): CMHO और जिला स्वास्थ्य टीम की सलाह से दो उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) को मॉडल के रूप में चुना जाएगा, जिन्हें बाद में पूरे जिले में लागू किया जाएगा।
चरण 2 (जिला समन्वय बैठक): प्रोजेक्ट की रूपरेखा और जिम्मेदारियां तय करने के लिए NCD सेल, महिला एवं बाल विकास और NRLM के सदस्यों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
चरण 3 (जिला टीम का गठन): स्वास्थ्य विभाग, NRLM और CDPO कार्यालय से एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो अपने विभाग के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट होंगे।
चरण 4 (डेटा गैप असेसमेंट): चुने गए दोनों उप-स्वास्थ्य केंद्रों के क्षेत्रों में आभा (ABHA) ID, स्क्रीनिंग कवरेज, CBAC रिस्क असेसमेंट और मोबाइल नंबरों के डेटा में क्या कमियां हैं, उनका NCD पोर्टल से मिलान कर बेसलाइन डेटा तैयार किया जाएगा।
चरण 5 (हाउसहोल्ड मैपिंग): कार्य क्षेत्र के सभी परिवारों की गांव/मोहल्ला-वार मैपिंग की जाएगी ताकि जनसंख्या का सही वितरण पता चल सके।
चरण 6 (स्वसहायता समूह की महिलाओं को जिम्मेदारी सौंपना): जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से परिवारों को स्वसहायता समूह की महिलाओं के बीच बांट दिया जाएगा। प्रत्येक महिला अपने आस-पड़ोस के परिवारों के समूह की जिम्मेदारी लेगी।
चरण 7 (आरोग्य सखी का चयन): प्रत्येक स्वयं सहायता समूह से एक महिला को 'आरोग्य सखी' के रूप में चुना जाएगा। वह अपने स्वसहायता समूह, परिवारों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच एक कड़ी के रूप में काम करेगी।
चरण 8 (आरोग्य सखियों की ट्रेनिंग): NRLM के सहयोग से आरोग्य सखियों को NCDs, बीमारियों की जांच (Screening), रेफरल प्रक्रिया और मरीजों के नियमित इलाज के फॉलो-अप के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
चरण 9 (स्क्रीनिंग की शुरुआत): साप्ताहिक विलेज-वाइज शेड्यूल के अनुसार घर-घर जाकर ब्लड प्रेशर (BP) और ब्लड शुगर की जांच शुरू की जाएगी। जांच से पहले SHG महिलाएं परिवारों को इसके लिए तैयार करेंगी।
चरण 10 (निगरानी और समीक्षा): जिला टीम के साथ समय-समय पर प्रगति की समीक्षा की जाएगी। स्क्रीनिंग, बीमारी की पहचान और फॉलो-अप के डेटा के लिए NCD पोर्टल को ही मुख्य और एकमात्र स्रोत (Source of Truth) माना जाएगा।
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40 views | Sagar, Madhya Pradesh | Oct 13, 2026