सुमन भारती शर्मा ने कहा कि यदि कार्यक्रम स्थल का जाति के आधार पर शुद्धीकरण किया गया है, तो यह केवल मल्लिकार्जुन खड़गे जी का अपमान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों दलितों, गरीबों और वंचितों के सम्मान एवं स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है।
उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के आने, बैठने या किसी स्थान को उसके बाद शुद्ध करने जैसी मानसिकता बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। दलित समाज किसी विशेष कृपा का नहीं, बल्कि बराबरी के अधिकार, सम्मान और गरिमा का हकदार है।