#नालंदा - चंडी प्रखंड क्षेत्र के बेलछी गांव में 144 वर्षों से चली आ रही बारहरूपिया परंपरा को जीवंत रख रहे ग्रामीण
नालंदा से संवाददाता राकेश कुमार
चंडी प्रखंड क्षेत्र के बेलछी गांव में करीब 144 वर्षों से चली आ रही देहाती कला, अभिनय और बारहरूपिया की पारंपरिक कला आज भी जीवंत है। जितिया पर्व के अवसर पर काली स्थान अखाड़ा पर ग्रामीणों द्वारा इस प्राचीन परंपरा का आयोजन किया जाता है। खास बात यह है कि बदलते समय के बावजूद गांव के युवा और समाजसेवी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
ग्रामीण मनोज कुमार उर्फ बबलू ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत करीब 144 वर्ष पहले हुई थी। गांव के मोती महतो, अकलू महतो और सरूप महतो सहित कई मजदूर काम की तलाश में बनारस गए थे। वहां उन्होंने लोक कला और बारहरूपिया की इस परंपरा को देखा और वापस लौटने के बाद इसे अपने गांव में शुरू किया। बताया जाता है कि बनारस से लाई गई यह परंपरा आज कई पीढ़ियों से बेलछी में निभाई जा रही है।
जितिया पर्व के दौरान काली स्थान अखाड़ा पर ग्रामीण कलाकार अलग-अलग रूप धारण कर अभिनय और लोक कला का प्रदर्शन करते हैं। इसमें देहाती जीवन, सामाजिक प्रसंग और पारंपरिक पात्रों को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि गांव की पुरानी सांस्कृतिक विरासत और पूर्वजों की याद से जुड़ी परंपरा है।
इस विरासत को बचाए रखने में गांव के युवा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मनोज कुमार, अरविंद कुमार, अखिलेश महतो, जोगिंदर महतो, अरविंद पासवान, सुमेंद्र पासवान, सतेंद्र पासवान और ओम प्रकाश पासवान समेत अन्य ग्रामीण परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि आधुनिकता के दौर में ऐसी लोक परंपराओं को बचाए रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी ग्रामीण कला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहें।
Rahui, Nalanda | Oct 4, 2026