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गैस एजेंसी का ब्लैक खेल : होम डिलीवरी के नाम पर वसूली और शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर देते हैं सिलेंडर ▪️OTP का रहस्यमयी खेल, जनता दोगुने भाव में सिलेंडर खरीदने को मजबूर खरसिया। शहर में गैस एजेंसी की मनमानी चरम पर है। होम डिलीवरी के नाम पर हर सिलेंडर में डिलीवरी चार्ज तो जोड़ा जा रहा है, पर घर तक सिलेंडर पहुंचता ही नहीं। हालात ये हैं कि एजेंसी की गाड़ी शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर खड़ी कर दी जाती है। मजबूर उपभोक्ता घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग भी इस अव्यवस्था में पिस रहे हैं। ऐसा कई बार होता है कि बुकिंग के लिए जारी नंबर पर सिलेंडर बुक करने पर OTP ही नसीब नहीं होती। कभी 10 दिन, कभी 15 दिन, तो कभी 25 दिन तक OTP का इंतजार करना पड़ता है। हैरानी की बात ये है कि एजेंसी संचालक को फोन करते ही तुरंत OTP मुहैया करा दी जाती है। आखिर ये कैसा सिस्टम है जो खुद ही फेल हो जाता है और फोन पर ठीक हो जाता है? आम लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसी और ब्लैकमेलरों की मिलीभगत से ये पूरा खेल चल रहा है। OTP न आने और डिलीवरी न मिलने से परेशान उपभोक्ता ब्लैक मार्केट से सिलेंडर लेने को मजबूर हैं। 700 से 1000 रुपए तक में ब्लैक में सिलेंडर बेचे जा रहे हैं। यानी सरकारी रेट पर सिलेंडर मिलना सपना बन गया है। ▪️विभाग मौन और जनता परेशान सबसे बड़ा सवाल पेट्रोलियम एवं खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों पर है। जनता की इस परेशानी पर आज तक किसी ने सुध नहीं ली, जबकि ये उनकी सीधी जवाबदारी है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी से एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं। अब सवाल ये उठता है कि जब सरकारी सिस्टम ही फेल हो जाए और अधिकारी आंख मूंद लें, तो आम नागरिक हलाकान-परेशान होने के अलावा करे भी तो क्या? क्या शासन इस 'गैस कांड' पर कोई कार्रवाई करेगा या जनता यूं ही लुटती रहेगी?

Kharsia, Raigarh | Jun 17, 2026
गैस एजेंसी का ब्लैक खेल : होम डिलीवरी के नाम पर वसूली और शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर देते हैं सिलेंडर ▪️OTP का रहस्यमयी खेल, जनता दोगुने भाव में सिलेंडर खरीदने को मजबूर खरसिया। शहर में गैस एजेंसी की मनमानी चरम पर है। होम डिलीवरी के नाम पर हर सिलेंडर में डिलीवरी चार्ज तो जोड़ा जा रहा है, पर घर तक सिलेंडर पहुंचता ही नहीं। हालात ये हैं कि एजेंसी की गाड़ी शहर से डेढ़ किलोमीटर दूर खड़ी कर दी जाती है। मजबूर उपभोक्ता घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग भी इस अव्यवस्था में पिस रहे हैं। ऐसा कई बार होता है कि बुकिंग के लिए जारी नंबर पर सिलेंडर बुक करने पर OTP ही नसीब नहीं होती। कभी 10 दिन, कभी 15 दिन, तो कभी 25 दिन तक OTP का इंतजार करना पड़ता है। हैरानी की बात ये है कि एजेंसी संचालक को फोन करते ही तुरंत OTP मुहैया करा दी जाती है। आखिर ये कैसा सिस्टम है जो खुद ही फेल हो जाता है और फोन पर ठीक हो जाता है? आम लोगों का आरोप है कि गैस एजेंसी और ब्लैकमेलरों की मिलीभगत से ये पूरा खेल चल रहा है। OTP न आने और डिलीवरी न मिलने से परेशान उपभोक्ता ब्लैक मार्केट से सिलेंडर लेने को मजबूर हैं। 700 से 1000 रुपए तक में ब्लैक में सिलेंडर बेचे जा रहे हैं। यानी सरकारी रेट पर सिलेंडर मिलना सपना बन गया है। ▪️विभाग मौन और जनता परेशान सबसे बड़ा सवाल पेट्रोलियम एवं खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों पर है। जनता की इस परेशानी पर आज तक किसी ने सुध नहीं ली, जबकि ये उनकी सीधी जवाबदारी है। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी से एजेंसियों के हौसले बुलंद हैं। अब सवाल ये उठता है कि जब सरकारी सिस्टम ही फेल हो जाए और अधिकारी आंख मूंद लें, तो आम नागरिक हलाकान-परेशान होने के अलावा करे भी तो क्या? क्या शासन इस 'गैस कांड' पर कोई कार्रवाई करेगा या जनता यूं ही लुटती रहेगी? - Kharsia News