# नोखा के वीर दंपती किताबन बीबी और मोहम्मद्दीन आजाद की कहानी, घूंघट की आड़ में अंग्रेजों को दिया था चकमा
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**नोखा।** स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे स्थानीय नायक रहे, जिनका योगदान भले ही इतिहास की मुख्यधारा में ज्यादा दर्ज नहीं हो पाया, लेकिन उनके साहस और त्याग ने आजादी की लड़ाई को मजबूत किया। रोहतास के नोखा क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी दंपती **किताबन बीबी और मोहम्मद्दीन आजाद** की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणादायी गाथा है।
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में मोहम्मद्दीन आजाद ने जहां प्रत्यक्ष रूप से आंदोलन में भाग लिया, वहीं उनकी पत्नी किताबन बीबी ने भी जोखिम उठाकर उनका साथ दिया। दोनों ने अपने साहस और सूझबूझ से ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
### पति की गिरफ्तारी के लिए सक्रिय थी अंग्रेजी पुलिस
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन की पुलिस मोहम्मद्दीन आजाद को गिरफ्तार करने के लिए लगातार उनकी तलाश में थी। आंदोलन में सक्रिय रहने के कारण वह अंग्रेज अधिकारियों की नजर में आ चुके थे। ऐसे समय में पुलिस से बचते हुए आंदोलन को जारी रखना आसान नहीं था।
इसी मुश्किल दौर में किताबन बीबी ने अपने पति का साथ देते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
### घूंघट ने बना दिया सुरक्षा कवच
स्थानीय स्तर पर प्रचलित विवरणों के अनुसार, किताबन बीबी ने घूंघट की आड़ का इस्तेमाल कर अंग्रेज पुलिस को चकमा देने में अपने पति की मदद की। उस समय महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अंग्रेजी शासन के खिलाफ खड़ा होना आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने पति के संघर्ष में जोखिम उठाया।
किताबन बीबी की भूमिका इस बात का उदाहरण है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं ने भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों से महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
### नोखा थाना परिसर में फहराया तिरंगा
मोहम्मद्दीन आजाद के संघर्ष का एक साहसिक प्रसंग नोखा थाना परिसर से भी जुड़ा बताया जाता है। उन्होंने अंग्रेजी शासन के दौर में **नोखा थाना परिसर में तिरंगा फहराकर** ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी।
उस समय किसी सरकारी प्रतिष्ठान पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना ब्रिटिश शासन के लिए सीधी चुनौती माना जाता था। इसके बावजूद आजाद ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कायम रखी।
### पति के संघर्ष में बराबर की भागीदार रहीं किताबन बीबी
किताबन बीबी केवल अपने पति के साथ खड़ी रहने वाली महिला नहीं थीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने भी स्वतंत्रता आंदोलन में अपना योगदान दिया। उन्होंने साहस, धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए पति के संघर्ष को मजबूती दी।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि भारत की आजादी की लड़ाई में महिलाओं ने घर की सीमाओं से बाहर निकलकर कई तरह की चुनौतियों का सामना किया था।
### स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा सामने लाने की जरूरत
नोखा क्षेत्र के लोगों का मानना है कि किताबन बीबी और मोहम्मद्दीन आजाद जैसे स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियों को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए। स्थानीय इतिहास में दर्ज ऐसी घटनाएं युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के जमीनी स्वरूप और आम लोगों की भूमिका से परिचित कराती हैं।
आजादी की वर्षगांठ पर ऐसे गुमनाम या कम चर्चित स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना केवल उन्हें श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष, साहस और देशभक्ति की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
किताबन बीबी और मोहम्मद्दीन आजाद की कहानी इस बात की प्रेरक मिसाल है कि स्वतंत्रता की भावना से प्रेरित सामान्य नागरिक भी दमनकारी सत्ता के सामने असाधारण साहस का परिचय दे सकते हैं।
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