
#SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए Form 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर अहम फैसला लिया है। आयोग ने उन राज्यों में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला किया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
यह अतिरिक्त घोषणा नए मतदाताओं से उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगती थी। जुलाई में ऑनलाइन Form 6 के साथ जोड़ी गई इस अतिरिक्त जानकारी को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं।
30 सितंबर को सामने आए फैसले के मुताबिक, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां नए मतदाताओं को अब यह अतिरिक्त SIR घोषणा भरने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामलों में सामान्य Form 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां यह अतिरिक्त घोषणा फिलहाल उपलब्ध रहेगी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि देशभर में सभी नए मतदाताओं से माता-पिता की पुरानी चुनावी जानकारी मांगना पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु तथा विवेक जोशी के बीच 26 सितंबर को हुई बैठक में भी चर्चा हुई थी। इससे पहले दोनों चुनाव आयुक्तों ने Form 6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा को लेकर आपत्ति दर्ज की थी।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल वैधानिक Form 6 में बदलाव नहीं किया गया था। SIR के दौरान उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।
SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए अन्य कदमों की भी घोषणा की है। इनमें जरूरत वाले मामलों में घर पर सत्यापन, विशेष परिस्थितियों में ऑनलाइन सुनवाई और कमजोर वर्गों के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इस फैसले का सीधा असर उन नए मतदाताओं की प्रक्रिया पर पड़ेगा, जो ऐसे राज्यों में मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराना चाहते हैं जहां SIR पूरा हो चुका है। वहीं SIR वाले राज्यों में लागू अतिरिक्त प्रक्रिया को लेकर स्थिति अलग रहेगी।
Gormi, Bhind | Oct 1, 2026