
जिला जनसम्पर्क कार्यालय दतिया (म.प्र.)
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साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों के लिए विशेष सत्र का आयोजन
दतिया 29 सितम्बर 2026 / मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा साइन लैंग्वेज वीक के अवसर पर श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों के लिए एक विशेष जागरूकता एवं सशक्तिकरण सत्र का आयोजन आज मंगलवार 29 सितंबर 2026 को एमपीएसएलएसए जबलपुर के ऑडिटोरियम में किया गया। इसी अनुक्रम में जिला दतिया के एडीआर भवन में भी मूकबधिर विद्यालय में अध्यनरत श्रवण एवं वाक बाधित छात्र-छात्राएं भी एडीआर भवन में सांकेतिक भाषा विशेषज्ञ सहित उपस्थित होकर उक्त कार्यशाला में सहभागिता की।कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान, थीम सॉन्ग का सांकेतिक भाषा में प्रस्तुतीकरण तथा पाठ्यक्रम (ब्वनतेम) का शुभारंभ किया गया।
विशेष सत्र में श्रवण बाधित बच्चों द्वारा अपने अनुभव साझा करते हुए Voices of Inspiration के अंतर्गत प्रेरणादायी वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। इसके बाद मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल द्वारा विशेष संबोधन तथा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया द्वारा विशेष संबोधन दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान “मेरी आवाज़ सुनो” शीर्षक वीडियो का अनावरण भी किया गया। इसके पश्चात मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति श्री अल्पेश वाई. कोगजे द्वारा मुख्य वक्तव्य दिया गया।
इस विशेष सत्र का उद्देश्य किशोरों को कानूनी अधिकारों, भावनात्मक स्वास्थ्य, डिजिटल सुरक्षा, शिक्षा, करियर तथा सामाजिक चुनौतियों के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करना तथा उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में साइन लैंग्वेज को ध्यान में रखते हुए बच्चों के लिए सुलभ एवं समावेशी तरीके से विभिन्न विषयों पर संवाद किया गया।
कार्यक्रम के दौरान किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत बच्चों के अधिकारों एवं न्याय तक पहुंच के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका, निःशुल्क विधिक सहायता तथा ‘संकल्प/संकते वाणी’ एंड्रॉयड ऐप के माध्यम से उपलब्ध सहायता के बारे में भी बताया गया। इस सत्र का संचालन डच्ैस्ै। की सदस्य सचिव सुश्री सुमन श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन पर भी विशेष चर्चा हुई। क्रोध, चिंता, तनाव एवं साथियों के दबाव से निपटने, स्वयं की देखभाल, सहायता मांगने तथा स्वस्थ दिनचर्या एवं प्रभावी संवाद के महत्व पर जानकारी दी गई।
बच्चों की कला एवं रचनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न अवसरों की जानकारी दी गई। डॉ. शैलाई धोपा द्वारा नृत्य एवं कला के क्षेत्र में श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों के प्रशिक्षण एवं अनुभव साझा किए गए। वहीं अभिभावकों की भूमिका पर सुश्री दर्शना जैन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बच्चों में आत्मविश्वास, शिक्षा, खेल तथा वैकल्पिक करियर के अवसर विकसित करने पर प्रकाश डाला।
इस दौरान करियर मार्गदर्शन एवं भविष्य की तैयारी विषय पर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध करियर अवसरों, सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों एवं आरक्षण तथा श्रवण बाधित क्षेत्र के सफल व्यक्तियों की प्रेरक कहानियों के माध्यम से बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा, दुर्व्यवहार एवं शोषण की रोकथाम पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। बच्चों की कमजोरियों एवं जोखिमों की पहचान, यौन शोषण से बचाव तथा सुरक्षा के उपायों को विजुअल स्टोरी-कार्ड एवं साइन डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से समझाया गया। इस सत्र में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की श्रनअमदपसम श्रनेजपबम ब्वउउपजजमम के वरिष्ठ सलाहकार श्री गुरमुख सिंह लांबा ने मार्गदर्शन दिया।
विशेष रूप से बच्चों के लिए साइन लैंग्वेज के माध्यम से समूह गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों ने लैंगिक हिंसा, बुलिंग एवं ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे विषयों पर साइन लैंग्वेज में लघु नाटिकाएं प्रस्तुत कीं तथा समूह चर्चा के माध्यम से अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में डिजिटल सुरक्षा एवं साइबर जागरूकता पर जानकारी दी गई। सुरक्षित सोशल मीडिया उपयोग, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन जोखिम तथा कानूनी उपायों एवं साइबर हेल्पलाइन/रिपोर्टिंग पोर्टल के संबंध में बच्चों को जागरूक किया गया। यह सत्र श्री जितेंद्र सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, क्राइम, जबलपुर द्वारा लिया गया।
इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा, कौशल, आत्मविश्वास और भविष्य के अवसरों के लिए सशक्त बनाने का संदेश दिया गया।
ऑनलाइन आयोजित इस कार्यशाला के शुभारंभ के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहित जिला स्थापना दतिया के समस्त न्यायाधीशगण उपस्थित रहे।
क्रमांक 102/2026
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