
सिर्फ डेढ़ साल के इलाज के बाद एक अल्जाइमर मरीज के दिमाग में जमा प्रोटीन की परतें गायब हो गईं।
लेकिन इस खबर के पीछे की असली बात इससे भी ज्यादा दिलचस्प है।
फ्लोरिडा के 79 साल के स्कॉट मिलिंस्की को शुरुआती अल्जाइमर था। उन्हें एक नई दवा किसुनला दी गई, जिसे महीने में एक बार नस के जरिए दिया जाता है।
करीब 18 महीने में उन्होंने 18 इन्फ्यूजन लिए। इलाज के बाद जब उनका दोबारा पीईटी स्कैन किया गया, तो दिमाग में जमा एमिलॉयड बीटा प्रोटीन की प्लाक दिखाई नहीं दीं।
आसान भाषा में समझें तो अल्जाइमर में दिमाग की कोशिकाओं के आसपास कुछ प्रोटीन जमा होकर प्लाक बना सकते हैं। किसुनला का काम इन्हीं एमिलॉयड प्लाक को निशाना बनाकर शरीर की इम्यून सिस्टम की मदद से हटाना है।
लेकिन यहां एक बहुत जरूरी बात है—प्लाक साफ होने का मतलब अल्जाइमर पूरी तरह ठीक हो गया, ऐसा नहीं है।
अमेरिकी एफडीए ने किसुनला को शुरुआती अल्जाइमर यानी हल्की याददाश्त और सोचने-समझने की समस्या वाले मरीजों के लिए मंजूरी दी है। क्लिनिकल ट्रायल में इस दवा ने बीमारी से जुड़ी याददाश्त और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में गिरावट की रफ्तार को धीमा किया।
यानी इस मामले में सबसे बड़ी उपलब्धि दिमाग से एमिलॉयड प्लाक का लगभग पूरी तरह हटना है, न कि बीमारी का पूरी तरह खत्म हो जाना।
साथ ही यह इलाज हर किसी के लिए आसान या जोखिम-मुक्त नहीं है। किसुनला से दिमाग में सूजन या छोटे रक्तस्राव जैसी एआरआईए समस्या हो सकती है, इसलिए इलाज के दौरान एमआरआई जैसी निगरानी जरूरी होती है।
ओरिजन सोर्स: साउथ फ्लोरिडा हॉस्पिटल न्यूज़
क्या आपको लगता है कि भविष्य में ऐसे इलाज अल्जाइमर को काफी हद तक रोक पाएंगे?
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Bihar, India | Aug 16, 2026