💥 देहरादून: 'सरकार हमारे लिए मर चुकी है!' गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग को लेकर विधानसभा के बाहर आंदोलनकारियों का सामूहिक मुंडन 💥
देहरादून: उत्तराखंड की स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब अपने सबसे उग्र और भावुक मोड़ पर पहुंच चुका है। 'स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति' द्वारा देहरादून धरना स्थल पर 100 से अधिक दिनों के ऐतिहासिक क्रमिक अनशन के बाद भी जब सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलनकारियों ने आज एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया। समिति के सदस्यों ने देहरादून में विधानसभा भवन के ठीक सामने बैठकर सामूहिक मुंडन करवाकर सरकार के खिलाफ अपना तीखा आक्रोश प्रकट किया।
🏛️ "राजधानी के लिए सरकार मर चुकी है" – पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी
सामूहिक मुंडन के इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समिति के अध्यक्ष और पूर्व आईएएस (IAS) विनोद प्रसाद रतूड़ी ने सरकार की हठधर्मिता पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:
"उत्तराखंड राज्य को बने 25 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन आज तक इसे अपनी स्थाई राजधानी नहीं मिल पाई है, जबकि इसी मुख्य उद्देश्य के लिए राज्य का गठन हुआ था। आज भी गैरसैंण का सपना अधूरा है। हिंदू संस्कारों में सामूहिक मुंडन या तो बच्चे के जन्म पर होता है या फिर घर के बड़े-बुजुर्गों के निधन पर। चूंकि वर्तमान सरकार स्थाई राजधानी गैरसैंण के मुद्दे पर पूरी तरह मर चुकी है, इसलिए हमने रोष स्वरूप यह सामूहिक मुंडन करवाया है।"
🚨 15 अगस्त से ऐतिहासिक 'देहरादून-गैरसैंण महा-पदयात्रा' का शंखनाद
समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई 'प्रण से प्राण तक' की है और सरकार की वादाखिलाफी के जवाब में आंदोलन को और तेज किया जा रहा है:
पदयात्रा का आगाज: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को देहरादून विधानसभा भवन के सामने से एक विशाल महा-पदयात्रा का शंखनाद किया जाएगा।
विभिन्न पड़ावों से गुजरेगी यात्रा: यह ऐतिहासिक पदयात्रा देहरादून से शुरू होकर राज्य के विभिन्न पड़ावों, कस्बों और गांवों से होते हुए गैरसैंण पहुंचेगी, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता को इस स्वाभिमान की लड़ाई से जोड़ना है।
गैरसैंण में फिर अनशन: आंदोलनकारियों ने साफ एलान किया है कि गैरसैंण पहुंचने के बाद वहां दोबारा क्रमिक अनशन तब तक अनवरत जारी रहेगा, जब तक सरकार गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करने का आधिकारिक फैसला नहीं ले लेती।
💬 आपकी राय और विचार
राज्य गठन के 25 साल बाद भी स्थाई राजधानी के लिए आंदोलनकारियों द्वारा विधानसभा के बाहर सामूहिक मुंडन कराने और 15 अगस्त से शुरू होने वाली इस महा-पदयात्रा पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर साझा करें!
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