
पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी: कवरेज से रोकना, धमकाना या कैमरा छीनना गंभीर मामला
नई दिल्ली। पत्रकारों को जनहित से जुड़ी खबरों की कवरेज के दौरान कई बार विरोध, धमकी या बाधा का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में पत्रकारों को अपने कानूनी अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी है।
1 जुलाई 2024 से देश में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 लागू है।इसके बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के स्थान पर बीएनएस के प्रावधान लागू हैं।
यदि किसी पत्रकार को खबर की कवरेज, फोटो या वीडियो बनाने से रोका जाता है, धमकाया जाता है, कैमरा या मोबाइल छीना जाता है अथवा उपकरण को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो घटना की प्रकृति के अनुसार संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
कवरेज के दौरान बाधा डालने पर
किसी पत्रकार का रास्ता रोकना, उसे जबरन रोकना या कवरेज में बाधा डालना परिस्थितियों के अनुसार सदोष अवरोध या सदोष परिरोध से संबंधित प्रावधानों के दायरे में आ सकता है।
यदि पत्रकार को धमकाया या अपमानित किया जाता है, तो घटना के तथ्यों के आधार पर आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान से संबंधित धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
कैमरा या अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाने पर
पत्रकार के कैमरे, मोबाइल, माइक या अन्य उपकरण को जानबूझकर क्षतिग्रस्त करने की स्थिति में **संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित प्रावधान** लागू हो सकते हैं। किसी उपकरण को जबरन छीनने की घटना में भी मामले के तथ्यों के आधार पर अलग-अलग धाराएं लग सकती हैं।
मारपीट या चोट पहुंचाने की स्थिति
यदि कवरेज के दौरान पत्रकार के साथ मारपीट की जाती है या उसे चोट पहुंचाई जाती है, तो चोट की प्रकृति और घटना की परिस्थितियों के अनुसार संबंधित बीएनएस धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।
एफआईआर में घटना का स्पष्ट विवरण दें
शिकायत या एफआईआर में पत्रकार को अपनी पहचान, समाचार संस्थान, घटना का स्थान, तारीख और समय तथा आरोपी द्वारा किए गए प्रत्येक कृत्य का स्पष्ट विवरण देना चाहिए। कैमरा, मोबाइल या अन्य उपकरण को नुकसान पहुंचाने की घटना हो तो उसका विवरण और उपलब्ध फोटो/वीडियो भी सुरक्षित रखना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर शिकायत में लिखा जा सकता है;
“मैं ______ समाचार पत्र/चैनल का ______ क्षेत्र का पत्रकार हूं। मैं जनहित में समाचार का कवरेज कर रहा था। इसी दौरान आरोपी ______ ने मुझे कवरेज करने से रोका तथा मेरे साथ गाली-गलौज, धमकी और हाथापाई की। आरोपी द्वारा मेरे कैमरे/मोबाइल को नुकसान पहुंचाने अथवा रिकॉर्डिंग हटाने का प्रयास किया गया। घटना के संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी धाराओं में कार्रवाई की जाए।”
महत्वपूर्ण: एफआईआर में वही धाराएं लिखवाने की मांग करें जो घटना के वास्तविक तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लागू होती हों। किसी विशेष धारा का अंतिम निर्धारण पुलिस/जांच एजेंसी और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।