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मंगल के आसमान में छिपा एक छोटा सा चंद्रमा 149 साल पहले इंसानों की नजर में आया था। इस खोज ने मंगल के बारे में हमारी समझ को एक नई दिशा दी। 17 अगस्त 1877 को अमेरिकी खगोलशास्त्री आसफ हॉल ने मंगल के छोटे चंद्रमा फोबोस को खोज निकाला। यह खोज वॉशिंगटन डीसी स्थित अमेरिकी नौसेना वेधशाला में की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि फोबोस की खोज अचानक नहीं हुई थी। आसफ हॉल कई रातों से मंगल के आसपास किसी चंद्रमा की तलाश कर रहे थे। पहले उन्हें डीमोस मिला और उसके करीब छह दिन बाद फोबोस भी उनकी नजर में आ गया। फोबोस मंगल से बेहद करीब है। यह मंगल की सतह से लगभग 6,000 किलोमीटर ऊपर घूमता है और सिर्फ करीब 7 घंटे 39 मिनट में मंगल का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इतनी तेज परिक्रमा के कारण मंगल की सतह से देखने पर यह एक ही दिन में कई बार आसमान पार करता दिखाई दे सकता है। इस छोटे चंद्रमा की सतह पर स्टिकनी क्रेटर नाम का एक विशाल गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 9.7 किलोमीटर है। यह फोबोस की चौड़ाई का लगभग आधा हिस्सा घेरता है। इसका नाम आसफ हॉल की पत्नी एंजेलिन स्टिकनी के नाम पर रखा गया था। और सबसे हैरान करने वाली बात इसका भविष्य है। मंगल का गुरुत्वाकर्षण फोबोस को धीरे-धीरे अपनी तरफ खींच रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आने वाले करोड़ों वर्षों में यह मंगल से टकरा सकता है या टूटकर मंगल के चारों तरफ एक रिंग बना सकता है। यानी जिस चंद्रमा को इंसानों ने 1877 में पहली बार देखा था, उसका भविष्य शायद मंगल के साथ जुड़कर खत्म होगा। ओरिजन सोर्स: नासा की आधिकारिक रिपोर्ट आपको क्या लगता है, फोबोस आखिर मंगल से टकराएगा या एक शानदार रिंग में बदल जाएगा? #Space #Mars #Phobos #Astronomy #Science - Bihar News