
"रात के अंधेरे में पूरे प्रशासन को पैसा देते हैं, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता!" बुढार में रात भर बजता है रेत माफिया का डंका; केशौरी कसेड़ नदी से मरजाद घाट पर बेखौफ उत्खनन
बुढार/शहडोल।
दिन के उजाले में खामोशी और सूरज ढलते ही शुरू होता है प्राकृतिक संपदा की खुली लूट का काला खेल! बुढार थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले केशौरी ग्राम के कसेड़ नदी और मरजाद घाट पर पूरी वारदात रात के अंधेरे में अंजाम दी जा रही है।
जब पूरा इलाका सो रहा होता है, तब रेत माफिया की गाड़ियां नदी का सीना चीरने के लिए बेधड़क उतर पड़ती हैं।
स्थानीय प्रशासन की कथित अनदेखी और पुलिस की सुस्ती का फायदा उठाकर माफिया रात भर मिनी ट्रक की मदद से नदी की कोख खोखली करने में जुटे हुए हैं।
👉रात के सन्नाटे में मशीनों की गूंज और चीरता सीना
ग्रामीणों के अनुसार, कसेड़ नदी और मरजाद घाट पर शाम ढलते ही अवैध उत्खनन का तांडव शुरू हो जाता है,जो तड़के सुबह तक बदस्तूर जारी रहता है।
👉अंधेरे का फायदा उठाता माफिया: एनजीटी (NGT) के सख्त निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के प्रतिबंधों की धज्जियां उड़ाते हुए बेखौफ रेत कारोबारी रात के अंधेरे में नदियों को गहरे जानलेवा गड्ढों में तब्दील कर रहे हैं।
👉जलस्तर पर गहराता खतरा: रात-दिन के इस अंधाधुंध उत्खनन के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह बुरी तरह बाधित हो रहा है और आसपास का भूजल स्तर तेज़ी से गिरता जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है।
रात में दौड़ते ओवरलोड वाहन, बुढार पुलिस और खनिज विभाग सुस्त
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बुढार थाना क्षेत्र के इतने करीब रात के सन्नाटे में खुलेआम यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है?
👉अंधी बनी नाइटी गश्ती टीम: रेत से लदे अवैध रेत मिनी ट्रक और ट्रैक्टर रात भर मुख्य मार्गों से फर्राटे भरते हैं,लेकिन गश्त का दावा करने वाली पुलिस और खनिज विभाग की नज़र इन पर क्यों नहीं पड़ती?
👉शिकायतों पर सिर्फ खानापूर्ति: ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि रात में जारी इस लूट की बार-बार शिकायत करने के बावजूद सिर्फ नाममात्र की कागजी खानापूर्ति की जाती है, जिससे माफियाओं के हौसले आसमान छू रहे हैं।
👉खस्ताहाल सड़कें और हादसों का रात भर बना साया
रात के अंधेरे में तेज़ रफ्तार और बिना लाइट/ओवरलोड दौड़ते इन रेत के ट्रकों-ट्रैक्टरों के कारण केशौरी और मरजाद आसपास की ग्रामीण सड़कों की हालत पूरी तरह बदतर हो चुकी है।
रात के समय इन सड़कों पर से गुजरना राहगीरों और ग्रामीणों के लिए सीधे मौत को दावत देने जैसा हो गया है।
👉माफिया का सीधा तमाचा: "हम रात में प्रशासन को पैसा देते हैं, कर्मचारी आकर मिलते हैं गले!"
इस काले कारोबार का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब टोकने पर रेत कारोबारी बेधड़क बोले—
"हम पूरे पुलिसिया तंत्र और पूरे प्रशासन को पैसा देते हैं, हमारा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता!
रात के अंधेरे में जिम्मेदार अधिकारियों के कर्मचारी खुद आकर हमसे गले मिलते हैं।"
👉माफिया के इस सनसनीखेज बयान ने साफ कर दिया है कि बुढार क्षेत्र में कानून का खौफ खत्म हो चुका है और खाकी की मिलीभगत से ही रात के सन्नाटे में यह लूट का खेल फल-फूल रहा है।
👉विशेष खुलासे की तैयारी — शेष अगले अंक में:
रात के अंधेरे में कौन-कौन से जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस अवैध खनन के खेल में शामिल होते हैं?
किसकी कितनी मिनी ट्रक (कट-मनी) तय है, किस माध्यम से रात में कितनी रकम ली जाती है और कौन से अफसर इस काले धंधे को शह दे रहे हैं—अगले अंक में सभी के नाम, वसूली की रकम और हिस्सेदारी के पक्के सबूतों के साथ बड़ा पर्दाफाश! देखते रहिए...