
सफलता की कहानी: जैविक खेती और फसल विविधीकरण से आत्मनिर्भरता की राह पर कृषक तुलसीराम कुशवाह
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विदिशा जिले में नटेरन विकासखंड के ग्राम गुरोद के कृषक श्री तुलसीराम/मोहनलाल कुशवाह ने 40 वर्षों के कृषि अनुभव, जैविक खाद के उपयोग और फसल विविधीकरण को अपनाकर खेती को बनाया लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय स्थापित किया है।
मेहनत, अनुभव और खेती में निरंतर नए प्रयोग करने की इच्छाशक्ति यदि साथ हो तो कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मजबूत माध्यम बन सकती है। विकासखंड नटेरन के ग्राम गुरोद के कृषक श्री तुलसीराम/मोहनलाल कुशवाह की सफलता की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। लगभग चार दशकों से खेती कर रहे श्री कुशवाह ने पारंपरिक कृषि अनुभव को आधुनिक सोच और जैविक पद्धतियों से जोड़ते हुए अपनी खेती को विविध एवं टिकाऊ स्वरूप प्रदान किया है।
कृषक के पास कुल 10 बीघा कृषि भूमि है। इसमें वे 4 बीघा में जैविक सब्जी उत्पादन तथा 6 बीघा में ब्लैकबोल्ड किस्म की सोयाबीन की खेती कर रहे हैं। इसके साथ ही रबी मौसम में उन्होंने गेहूं की 1544 किस्म की उन्नत खेती की। इस प्रकार खरीफ और रबी दोनों मौसमों में भूमि का बेहतर उपयोग करते हुए वे कृषि से आय के विभिन्न स्रोत विकसित कर रहे हैं।
4 बीघा में विविध जैविक सब्जी उत्पादन -
श्री तुलसीराम कुशवाह अपनी 4 बीघा भूमि में विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन जैविक तरीके से कर रहे हैं। उनके खेत में बैंगन, मिर्ची, पालक/पाला, धनिया, गिलकी, भिंडी, ककड़ी और चुकंदर जैसी विविध सब्जियां उगाई जा रही हैं।
सब्जी उत्पादन में कृषक का विशेष जोर रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और खेत एवं घर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर है। वे मुख्य रूप से गोबर की खाद यानी FYM का उपयोग करते हैं। इस पद्धति से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और खेत के स्वास्थ्य को बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
विविध सब्जियों की खेती से उन्हें अलग-अलग समय पर उत्पादन प्राप्त होता है, जिससे नियमित आय के अवसर भी बनते हैं। फसल विविधीकरण के माध्यम से एक ही फसल पर निर्भरता कम होती है और कृषि जोखिम को भी संतुलित करने में मदद मिलती है।
6 बीघा में ब्लैकबोल्ड सोयाबीन की खेती -
कुल 10 बीघा कृषि क्षेत्र में से श्री कुशवाह ने 6 बीघा में ब्लैकबोल्ड किस्म की सोयाबीन लगाई है। सोयाबीन क्षेत्र की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है और कृषक ने सब्जी उत्पादन के साथ इसे जोड़कर अपनी कृषि व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाया है। क्षेत्रीय कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री संगम रघुवंशी द्वारा कृषक को समय-समय पर कृषि संबंधी आवश्यक जानकारी एवं सुझाव दिए जा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और अपने अनुभव के आधार पर कृषक फसल प्रबंधन की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
रबी में गेहूं की उन्नत खेती से वर्षभर खेत का उपयोग -
वर्ष 2025 की खरीफ फसल के बाद कृषक द्वारा खेत में गेहूं की 1544 किस्म की खेती की गई। प्राकृतिक खाद के उपयोग के साथ गेहूं का अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ। खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसल लेने की व्यवस्था से कृषक अपने कृषि क्षेत्र का वर्षभर बेहतर उपयोग कर रहे हैं। यह मॉडल यह दर्शाता है कि उपलब्ध भूमि का योजनाबद्ध तरीके से उपयोग कर किसान अलग-अलग मौसमों में विभिन्न फसलों से आय प्राप्त कर सकता है।
घर पर तैयार गोबर की खाद बनी जैविक खेती का आधार -
श्री तुलसीराम कुशवाह की खेती की खास विशेषता यह है कि वे गोबर की खाद बाजार से खरीदने के बजाय घर पर ही तैयार करते हैं। घर पर उपलब्ध गोबर एवं जैविक अवशेषों का उपयोग कर खाद तैयार की जाती है और पर्याप्त रूप से सड़ी-गली खाद को खेत में डाला जाता है। इससे बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने और खेती की लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। साथ ही जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थ बनाए रखने, उसकी संरचना और जलधारण क्षमता को बेहतर रखने में मदद मिलती है। विशेष रूप से सब्जी उत्पादन में FYM के उपयोग से कृषक बैंगन, मिर्ची, पालक/पाला, धनिया, गिलकी, भिंडी, ककड़ी और चुकंदर जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस तरह घर पर तैयार गोबर की खाद उनके लिए केवल खाद नहीं, बल्कि कम लागत, संसाधन पुनर्चक्रण और टिकाऊ कृषि का महत्वपूर्ण आधार बन गई है।
“घर का गोबर खेत की खाद, कम लागत में बेहतर उत्पादन—यही है प्राकृतिक संसाधनों के सदुपयोग की मिसाल।”
40 वर्षों का अनुभव और नई सोच बना सफलता का आधार
श्री तुलसीराम कुशवाह की सफलता के पीछे लगभग 40 वर्षों का कृषि अनुभव, कठिन परिश्रम, जैविक खेती के प्रति विश्वास, फसल विविधीकरण और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग प्रमुख आधार हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि किसान अपने अनुभव को आधुनिक कृषि सोच के साथ जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकते हैं। एक ओर जहां विविध सब्जी उत्पादन से अलग-अलग समय पर आय का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सोयाबीन और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों के माध्यम से कृषि आय को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रेरणादायक संदेश -
कृषक श्री तुलसीराम/मोहनलाल कुशवाह की खेती आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि खेती में विविधता, प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग और लगातार सीखने की प्रवृत्ति अपनाकर किसान अपनी कृषि व्यवस्था को अधिक टिकाऊ एवं आत्मनिर्भर बना सकते हैं। “मेहनत, मिट्टी पर विश्वास और खेती में विविधता—यही है सफलता की पहचान।” #vidisha