
बलिया में CJP के “स्कूल ठीक करो” अभियान के बाद अब BSA के कथित नए आदेश की चर्चा है, जिसमें बिना अनुमति स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री रोकने की बात सामने आई है।
सवाल यह है कि क्या सरकारी स्कूलों की बदहाली पर सवाल उठाना भी अब इतना असहज हो गया है कि स्कूलों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने की जरूरत पड़ रही है?
स्कूल किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के बच्चों और जनता के टैक्स से चलने वाली सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। अगर कोई अभियान स्कूलों की जमीनी हकीकत—टूटी व्यवस्था, गंदगी, शिक्षकों की कमी या दूसरी समस्याओं—को सामने ला रहा है, तो उसका जवाब रोक-टोक नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
हालांकि बच्चों की सुरक्षा के लिए अनधिकृत प्रवेश पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन इसकी आड़ में जनता की जायज शिकायतों और निगरानी की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।
अगर स्कूलों में सब कुछ बेहतर है तो सवालों से डर कैसा?
CJP का “स्कूल ठीक करो” अभियान हो या किसी आम नागरिक की शिकायत—सरकार और शिक्षा विभाग को सवालों का जवाब कार्रवाई से देना चाहिए, प्रतिबंधों से नहीं।
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Ballia, Ballia | Aug 15, 2026