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मालासन सिर्फ बैठने की मुद्रा नहीं, बल्कि शरीर के निचले हिस्से की mobility को बेहतर करने वाला योगासन है। दिनभर कुर्सी पर बैठने से हमारे कूल्हे, टखने और जांघों की flexibility धीरे-धीरे कम हो सकती है। ऐसे में मालासन एक आसान तरीका हो सकता है, जो इन हिस्सों को एक साथ stretch और activate करता है। मालासन में पैरों को थोड़ा फैलाकर गहराई से squat किया जाता है। फिर घुटनों को बाहर की तरफ रखते हुए पैरों के तलवों को जमीन पर टिकाने की कोशिश की जाती है। इसके बाद हाथों को छाती के सामने नमस्कार की मुद्रा में जोड़ें और रीढ़ को जितना हो सके आराम से सीधा रखें। कोहनियां घुटनों के अंदर की तरफ रह सकती हैं, लेकिन घुटनों को जबरदस्ती बाहर धकेलना नहीं चाहिए। इस मुद्रा में सबसे ज्यादा काम hips, inner thighs, ankles और lower body पर होता है। नियमित अभ्यास से squat करने की क्षमता और निचले शरीर की mobility बेहतर होने में मदद मिल सकती है। मालासन को पाचन के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है। गहरी squat position पेट और pelvic area के आसपास हल्का दबाव और movement पैदा करती है, जिससे कुछ लोगों को bowel movement में मदद मिल सकती है। लेकिन इसे कब्ज का इलाज नहीं माना जा सकता। अगर एड़ियां जमीन पर नहीं टिकतीं, तो उनके नीचे मुड़ा हुआ कंबल या कोई सहारा रखा जा सकता है। शुरुआत में कुछ सांसों तक ही मुद्रा में रहें और शरीर की क्षमता के हिसाब से धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। लेकिन अगर घुटने, टखने, कूल्हे या कमर में दर्द या चोट है, तो मालासन जबरदस्ती न करें। यानी मालासन का असली फायदा शरीर को जबरदस्ती मोड़ना नहीं, बल्कि hips, ankles और lower body की movement को धीरे-धीरे बेहतर करना है। - Bihar News