90 लाख ₹ का टेंडर नगर निगम देकर ठेकेदारों पर मेहरबानी जरूर हो रही... लेकिन ये ठेकेदार सफाईकर्मियों का खून चूसते है.... उन्हें जितना मेहनताना मिलना चाहिए वो नहीं मिलता..........इसके साथ ही सफाई व्यवस्था वैसी नहीं हो पाती जैसे इंदौर मे है.... 90 लाख रूपये की बजाय सरकार सफाईकर्मियों की नियुक्ति करे.... जिससे ठेका प्रथा बंद हो......