
Bokaro में CISF की कार्रवाई ने खोली कोयला चोरी की परतें
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Bokaro: ज़िले में CISF की कार्रवाई के बाद झारखंड पुलिस को भी अपनी आंखें खोलने की जरूरत है। बैदकारो माइंस इलाके में एक ही अभियान में 207.17 टन ग्रेड-4 कोयला और चार मोटरसाइकिलों की बरामदगी यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन, भंडारण और ढुलाई का खेल कब से चल रहा था और इसकी भनक स्थानीय तंत्र को क्यों नहीं लगी।
##ड्रोन से निगरानी, जमीन पर बड़ा खुलासा
‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान के तहत CISF ने CCL के साथ मिलकर बैदकारो माइंस और आसपास के इलाकों में विशेष अभियान चलाया। ड्रोन से हवाई निगरानी के दौरान संदिग्ध स्थानों की पहचान की गई। इसके बाद क्विक रिएक्शन टीम (QRT) और स्निफर डॉग की मदद से जमीन पर तलाशी अभियान चलाया गया।
##207 टन से ज्यादा कोयला बरामद
तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध रूप से जमा किया गया 207.17 टन ग्रेड-4 कोयला बरामद हुआ। मौके से चार मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं। CISF के अनुसार, इन वाहनों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों की निगरानी और आवाजाही में किए जाने की आशंका है।
##सिर्फ कोयला जब्ती नहीं, नेटवर्क की जांच भी जरूरी
CISF ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल अवैध रूप से जमा कोयला बरामद करना नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क और अवैध परिवहन पर कार्रवाई करना भी है। बरामद कोयला और वाहनों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।
##पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
CISF की तकनीक आधारित कार्रवाई ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि यदि ड्रोन निगरानी से एक बड़े अवैध स्टॉक का पता लगाया जा सकता है, तो स्थानीय स्तर पर इसकी भनक क्यों नहीं लगी। एक साथ 207 टन से अधिक कोयले का जमा होना महज एक दिन की गतिविधि थी या लंबे समय से चल रहे किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा - इसकी जांच अब जरूरी है।
अगर जांच में यह सामने आता है कि ऐसी गतिविधियां लंबे समय से चल रही थीं, तो वर्षों तक इनके फलने-फूलने के दौरान निगरानी और कार्रवाई में हुई चूक की जवाबदेही भी तय करनी होगी।
Chas, Bokaro | Oct 2, 2026