इंडोनेशिया में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी।
53 लोगों की मौत के बाद अब लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स ने राहत और बचाव का काम और मुश्किल कर दिया है।
यह भूकंप 15 अगस्त को फ्लोरेस द्वीप के पास आया था। इसके झटकों से घर और दूसरी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कई जगह भूस्खलन हुआ और सड़कें मलबे से बंद हो गईं।
अब तक करीब 5,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। इनमें बड़ी संख्या में लोग खुले मैदानों, स्टेडियम और अस्थायी टेंट में रह रहे हैं, क्योंकि उन्हें कमजोर इमारतों में वापस जाने से डर लग रहा है।
भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 1,000 आफ्टरशॉक्स रिकॉर्ड हो चुके हैं। यही झटके राहत टीमों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन रहे हैं, क्योंकि मलबे और भूस्खलन के बीच किसी इमारत में फंसे लोगों तक पहुंचना जोखिम भरा हो गया है।
राहत और बचाव अभियान में 3,500 से ज्यादा सैनिक और पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। टीमों का फोकस उन इलाकों पर है जहां लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। कई जगह साफ पानी, खाना और कंबल जैसी चीजों की जरूरत भी सामने आई है।
भूकंप से 900 से ज्यादा घर सिर्फ ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत में तबाह हुए हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ जरूरी सड़कें भी बंद हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों तक मदद पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
इंडोनेशिया में भूकंप का खतरा ज्यादा रहता है, क्योंकि यह पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के इलाके में आता है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें सक्रिय हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है—मलबे में फंसे लोगों को जल्दी निकालना और हजारों विस्थापित लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाना।
ओरिजन सोर्स: रॉयटर्स की 16 अगस्त रिपोर्ट
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