जात पात के साथ गढ़ दोनों पूर्व में टूटे हैं, इतिहास पुराना है।
मजबूत इलाके का मिथ टूटते रहने से राजनीति का सौंदर्य बढ़ता है।
मधेपुरा में शरद यादव ने लालू यादव के गढ़ होने भ्रम तोड़ा था,
बक्सर में सुधाकर सिंह की जीत से ब्राह्मणों के गढ़ होने का भ्रम तोड़ा,
औरंगाबाद में अभय कुशवाहा की जीत से राजपूतों का गढ़ होने का भ्रम और मिथ टूटा।
आरा में सुदामा प्रसाद की जीत से, बना बनाया भ्रम टूटा।
अमेठी में गांधी परिवार के हारने से भ्रम टूटा था।
झारखंड के दुमका में शिबू सोरेन की हार से भ्रम और मिथ टूटा था।
इस तरह भ्रम, मिथ टूटते रहना चाहिए।
लोकतंत्र में कोई सीट किसी पार्टी, किसी जाति,किसी व्यक्ति, किसी परिवार के नाम से टैग हो जाए और उस आधार पर भ्रम, मिथ की तरह धारणा बन जाए तो यह ठीक नहीं होता।
इससे जाति के नाम पर निकम्मो को चुनाव जीतने का मौका मिल जाता है।।
प्रशांत किशोर जी को जीत की हार्दिक बधाई।।