करीब 440 साल पहले इटली के एक शक्तिशाली शाही परिवार में अचानक हुई एक मौत ने पूरे यूरोप में सनसनी मचा दी थी। लोग कहते थे कि राजकुमार को ज़हर देकर मार दिया गया, क्योंकि उसके दुश्मन भी कम नहीं थे। यह रहस्य सदियों तक इतिहास की सबसे चर्चित पहेलियों में से एक बना रहा।
लेकिन अब, लगभग साढ़े चार सौ साल बाद, इस रहस्य की गवाही किसी गवाह ने नहीं… बल्कि उसकी अपनी हड्डियों में बचा प्राचीन डीएनए लेकर दी है।
येल यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ़ पीसा के वैज्ञानिकों ने ग्रैंड ड्यूक फ्रांसेस्को प्रथम डी मेडिची के कंकाल से डीएनए निकाला। जब उसकी जांच की गई, तो उसमें Plasmodium falciparum और Plasmodium malariae नाम के मलेरिया परजीवियों के आनुवंशिक निशान मिले। यानी जिस व्यक्ति के बारे में सदियों से ज़हर देने की कहानी सुनाई जाती रही, वह वास्तव में मलेरिया से संक्रमित था।
इतना ही नहीं, उसके भाई कार्डिनल जियोवानी डी मेडिची के अवशेषों में भी मलेरिया के डीएनए मिले। वैज्ञानिकों को तो Plasmodium falciparum का एक ऐसा प्राचीन स्ट्रेन भी मिला, जो पहले कभी दर्ज नहीं किया गया था। इससे यह भी पता चला कि उस दौर में यूरोप में मलेरिया पहले से कहीं ज़्यादा फैला हुआ था।
हालाँकि, एक बात अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कुछ इतिहासकार अब भी मानते हैं कि पुराने आर्सेनिक वाले अध्ययन को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। इसलिए वैज्ञानिक यह नहीं कह रहे कि ज़हर की थ्योरी 100 प्रतिशत गलत साबित हो गई है। लेकिन प्राचीन डीएनए से मिला मलेरिया का सबूत अब तक का सबसे मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण माना जा रहा है कि उनकी मौत का असली कारण मलेरिया था, न कि कोई राजनीतिक साज़िश।
यह खोज दिखाती है कि आज का विज्ञान केवल भविष्य नहीं बदल रहा, बल्कि सदियों पुराने इतिहास के रहस्यों से भी धीरे-धीरे पर्दा उठा रहा है।
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