जब घड़ियाँ नहीं थीं, तब इंसान समय का हिसाब कैसे रखता था? हैरानी की बात है कि आसमान में छिपे संकेत ही उसकी प्राकृतिक घड़ी हुआ करते थे।
सूरज की बदलती स्थिति से दिन का अंदाजा लगाया जाता था, जबकि चाँद की कलाएँ (Lunar Phases) महीने का हिसाब रखने में मदद करती थीं। एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक लगभग 29.5 दिन लगते हैं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती! रात में दिखाई देने वाले तारों और तारामंडलों की स्थिति साल के अलग-अलग समय में बदलती है। प्राचीन लोग इन बदलावों से मौसम और साल के समय का अंदाजा लगाते थे।
धूपघड़ी (Sundial) से परछाईं देखकर समय भी मापा जाता था।
यानी घड़ियों के आविष्कार से बहुत पहले, इंसान प्रकृति के नियमित बदलावों को पढ़कर समय समझना सीख चुका था।
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Bihar, India | Oct 1, 2026