
समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर अभिमुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट
दिनांक: 28.09.2026
स्थान: परिचर्चा भवन, समाहरणालय, सीतामढ़ी
कार्यक्रम की अध्यक्षता: श्री बृज किशोर पांडेय, जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO)-सह-अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन, सीतामढ़ी
कार्यक्रम: राष्ट्रीय समुदाय-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम
विषय: ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजना (VDMP) एवं ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के साथ समायोजन
कार्यक्रम का उद्देश्य
राष्ट्रीय समुदाय-आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत दिनांक 28 सितंबर 2026 को परिचर्चा भवन, समाहरणालय, सीतामढ़ी में समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण के विषय पर अभिमुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा जोखिमों की पहचान, आपदा-पूर्व तैयारी, स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग तथा पंचायत स्तर की विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को शामिल करने के संबंध में जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित पदाधिकारियों को प्रशिक्षित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री बृज किशोर पांडेय, जिला पंचायत राज पदाधिकारी (DPRO)-सह-अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन, सीतामढ़ी द्वारा की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य समन्वयक-यूनिसेफ श्री वीरेंद्र पांडेय तथा जिला सलाहकार श्री गौरव श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
प्रतिभागियों की सहभागिता
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न प्रखंडों से संबंधित पदाधिकारियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें BPRO, मुखिया जी एवं पंचायत कार्यपालक सहायक शामिल रहे। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रखंडों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही—
बैरगनिया
सुरसंड
बेलसंड
रून्नीसैदपुर
परिहार
इन प्रतिभागियों को ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन एवं विकास योजना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा स्थानीय स्तर पर आपदा जोखिम को कम करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजना (VDMP)
प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजना (Village Disaster Management Plan-VDMP) के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय स्तर पर मौजूद संभावित आपदाओं, जोखिमों एवं संवेदनशीलताओं की पहचान करते हुए एक प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जानी चाहिए।
VDMP तैयार करते समय बाढ़, सूखा, आंधी-तूफान, अग्निकांड, अत्यधिक गर्मी, शीतलहर, महामारी आदि संभावित जोखिमों के साथ-साथ पंचायत में उपलब्ध संसाधनों, संवेदनशील परिवारों, बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगजनों तथा अन्य जरूरतमंद समूहों की पहचान करना आवश्यक है। इसके माध्यम से आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, राहत एवं बचाव कार्य को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि VDMP केवल एक दस्तावेज न होकर ग्राम पंचायत की वास्तविक परिस्थितियों, स्थानीय जोखिमों और समुदाय की आवश्यकताओं पर आधारित एक व्यावहारिक योजना होनी चाहिए।
GPDP के साथ VDMP का समायोजन
प्रशिक्षण का एक प्रमुख विषय ग्राम पंचायत आपदा प्रबंधन योजना (VDMP) को ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के साथ समायोजित करना रहा। प्रतिभागियों को बताया गया कि पंचायत के समग्र विकास की योजना बनाते समय आपदा जोखिम न्यूनीकरण को विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है।
GPDP में ऐसी गतिविधियों एवं कार्यों को शामिल किया जा सकता है, जो पंचायत को आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित एवं सक्षम बनाते हैं। उदाहरण के रूप में जल निकासी व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण, सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था, स्वच्छता, विद्यालय एवं आंगनबाड़ी की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, सुरक्षित सड़क एवं संपर्क व्यवस्था, सामुदायिक भवनों की उपयोगिता तथा स्थानीय स्तर पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषयों को शामिल किया जा सकता है।
योजना निर्माण में समुदाय की भूमिका
अभिमुखीकरण के दौरान समुदाय की सक्रिय भागीदारी को आपदा जोखिम न्यूनीकरण का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों को योजना निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करने से वास्तविक समस्याओं एवं स्थानीय जोखिमों की बेहतर पहचान की जा सकती है।
वार्ड समिति द्वारा योजना की समीक्षा एवं सुझाव, इसके बाद ग्राम सभा में योजना का प्रस्तुतिकरण एवं अनुमोदन तथा संबंधित योजनाओं को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने जैसे महत्वपूर्ण चरणों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि योजना निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी, सहभागी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
आपदा-लचीले गांव की अवधारणा
प्रशिक्षण में सुरक्षित एवं सतत विकास को आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जोड़ते हुए आपदा-लचीले गांव की अवधारणा पर चर्चा की गई। बताया गया कि केवल आपदा आने के बाद राहत एवं बचाव कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपदा से पहले तैयारी और जोखिम को कम करने के उपाय करना भी आवश्यक है।
इस संदर्भ में गरीबी-मुक्त एवं उन्नत आजीविका गांव, विविध आय स्रोत, रोजगार सुरक्षा, स्वस्थ गांव, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को आपदा-लचीले गांव के निर्माण से जोड़ा गया। यह समझाया गया कि मजबूत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षित जल एवं स्वच्छता व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन समुदाय की आपदा से उबरने की क्षमता को बढ़ाते हैं।
प्रशिक्षकों द्वारा दिए गए प्रमुख संदेश
राज्य समन्वयक-यूनिसेफ श्री वीरेंद्र पांडेय एवं जिला सलाहकार श्री गौरव श्रीवास्तव द्वारा प्रशिक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को VDMP एवं GPDP के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। प्रतिभागियों को स्थानीय जोखिमों की पहचान, जोखिम मानचित्रण, संवेदनशील समूहों की पहचान, उपलब्ध संसाधनों का आकलन तथा समुदाय आधारित तैयारी के बारे में जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान यह संदेश दिया गया कि पंचायत स्तर पर यदि जोखिमों की पहचान पहले से कर ली जाए और उपलब्ध संसाधनों तथा समुदाय की सहभागिता के आधार पर योजना तैयार की जाए, तो आपदा के संभावित प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी श्री पुष्कर कुमार, DPRC नोडल श्री शंकर जी, श्रीमती पूनम कुमारी, श्री मुकुंद सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लिया तथा पंचायत स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण को विकास योजनाओं से जोड़ने के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
निष्कर्ष
कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण को केवल आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी न मानकर पंचायत, जनप्रतिनिधि, प्रशासन एवं समुदाय की साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। VDMP और GPDP का प्रभावी समायोजन पंचायतों को स्थानीय जोखिमों के प्रति अधिक तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा—
“आपदा नहीं हो भारी, यदि पूरी हो तैयारी।”
समुदाय की सक्रिय भागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, पंचायत स्तर पर समन्वित योजना तथा विकास योजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण को शामिल करके सुरक्षित, सक्षम, सतत एवं आपदा-लचीले गांवों का निर्माण किया जा सकता है। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों को पंचायत स्तर पर प्राप्त प्रशिक्षण एवं जानकारी को व्यवहार में लागू करने के आह्वान के साथ किया गया।
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CMO Bihar Information & Public Relations Department, Government of Bihar Disaster Management Department Govt. of Bihar General Administration Department, Govt. of Bihar