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क्रांति के मशाल थामने वाले वीर | SA News Chhattisgarh 17-08-2026: भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास उन वीरों के त्याग और साहस से भरा है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ऐसे ही महान क्रांतिकारी थे मदन लाल ढींगरा, जिनका नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में अदम्य साहस और राष्ट्रभक्ति के लिए सम्मान के साथ लिया जाता है। प्रत्येक वर्ष 17 अगस्त को उनके बलिदान दिवस पर देश उनके सर्वोच्च त्याग को श्रद्धापूर्वक याद करता है। मदन लाल ढींगरा का जन्म 17 फरवरी 1883 को अमृतसर, पंजाब में एक समृद्ध परिवार में हुआ था। वर्ष 1906 में वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। लंदन में रहते हुए उनका संपर्क भारतीय राष्ट्रवादी विचारों से हुआ और वे विनायक दामोदर सावरकर तथा अन्य क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। इसके बाद उनके विचारों में भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने का संकल्प और अधिक दृढ़ हुआ। 1 जुलाई 1909 को लंदन में नेशनल इंडियन एसोसिएशन की एक बैठक के दौरान मदन लाल ढींगरा ने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली (Curzon Wyllie) की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया गया। उन्होंने अपने कृत्य की जिम्मेदारी स्वीकार की और ब्रिटिश अदालत से मिली मृत्युदंड की सजा का सामना दृढ़ता के साथ किया। 17 अगस्त 1909 को लंदन में उन्हें फांसी दे दी गई। उस समय उनकी आयु केवल 26 वर्ष थी। उनका बलिदान भारतीय युवाओं में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को प्रेरित करने वाली घटनाओं में गिना जाता है। मदन लाल ढींगरा का जीवन हमें यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि असंख्य वीरों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। आज उनके बलिदान दिवस पर हमें उनके साहस को नमन करते हुए देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रहित के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाने का संकल्प लेना चाहिए। #MadanLalDhingra #IndianFreedomStruggle #MadanLalDhingraMartyrdomDay #SANewsChhattisgarh #Chhattisgarh - Chhattisgarh News