
*!!.IPS डॉ. संजुक्ता पाराशर बनीं CRPF की नई IG: असम के जंगलों में AK-47 लेकर उग्रवादियों का खात्मा, ठोक डाले 16आतंकवादी.!!*
देशभक्ति, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की जब भी बात आती है, तो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की जांबाज महिला अधिकारियों का नाम सबसे पहले आता है। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित नाम है डॉ. संजुक्ता पाराशर का। असम की 'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर 2006 बैच की IPS अधिकारी संजुक्ता पाराशर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में महानिरीक्षक (IG) के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है। संजुक्ता पाराशर की यह नियुक्ति देश भर के उन लाखों युवाओं और छात्रों के लिए एक बड़ा संदेश है, जो चुनौतियों से डरने के बजाय उनका डटकर सामना करने का जज्बा रखते हैं।
*पढ़ाई में अव्वल और JNU से Ph.D.*
3 अक्टूबर 1979 को असम में जन्मीं संजुक्ता पाराशर का बचपन से ही पढ़ाई में गहरा लगाव था। उनके पिता सिंचाई विभाग में इंजीनियर और माता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं। गुवाहाटी में अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ गईं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित इंद्रप्रस्थ कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से इंटरनेशनल रिलेशन में MA, Mphil और Ph.D. की उच्च डिग्री प्राप्त की।
*UPSC में 85वीं रैंक और IPS का चयन*
कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास के दम पर संजुक्ता पराशर ने वर्ष 2006 में सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE) में पूरे देश में 85वीं ऑल इंडिया रैंक (AIR 85) हासिल की। इतनी शानदार रैंक होने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा (IAS) के बजाय भारतीय पुलिस सेवा (IPS) को चुना, क्योंकि वह जमीनी स्तर पर देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए काम करना चाहती थीं। उन्हें असम-मेघालय काडर आवंटित किया गया और वह असम की पहली महिला IPS अधिकारियों में शामिल हुईं।
*जंगलों में AK-47 लेकर उग्रवादियों का खात्मा*
असम में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने उग्रवाद प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था कायम करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जब बोडो और अन्य सशस्त्र उग्रवादी गुट असम के घने जंगलों में हिंसा फैला रहे थे, तब संजुक्ता पराशर ने कमांड सेंटर में बैठने के बजाय खुद मैदान में उतरने का फैसला किया। हाथों में AK-47 राइफल थामे घने जंगलों में कमांडो टीमों और सुरक्षा बलों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने महज 15 महीनों में 16 से अधिक खतरनाक उग्रवादियों को मुठभेड़ में ढेर कर दिया और 64 से ज्यादा को गिरफ्तार किया। उनके इसी अदम्य साहस और निडर नेतृत्व के कारण उन्हें 'आयरन लेडी ऑफ असम' का खिताब मिला।
*NIA से लेकर CRPF तक का शानदार सफर*
संजुक्ता पाराशर ने केवल मैदानी अभियानों में ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में उप महानिरीक्षक (DIG) के रूप में भी कई राष्ट्रीय सुरक्षा जांचों को अंजाम दिया। देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 'गृह मंत्री पदक' से भी सम्मानित किया जा चुका है।अब देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल CRPF में IG पद पर उनकी नियुक्ति उनकी प्रतिभा और निडर नेतृत्व पर मुहर लगाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए संजुक्ता पराशर का जीवन यह सीख देता है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।