
इंसान के हौसले बुलंद हो तो वह कुछ भी कर सकता है । जिस उम्र में ज्यादातर लोग आराम और रिटायरमेंट की जिंदगी बिताते हैं, उसी 85 साल की उम्र में हरियाणा के एक बुजुर्ग ने MA की मास्टर डिग्री हासिल कर मिसाल कायम कर दी। कभी सेना में देश के लिए लड़ाई लड़ी, फिर हरियाणा रोडवेज में सेवाएं दीं और खेल के मैदान में करीब 200 मेडल जीते। अब 85 वर्षीय लालचंद गोदारा ने पढ़ाई के मैदान में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सिरसा जिले के नुहियांवाली गांव के रहने वाले लालचंद गोदारा ने इग्नू से MA की पढ़ाई पूरी की है और 1200 में से 965 अंक हासिल किए हैं। लेकिन उनकी दोबारा पढ़ाई शुरू करने की कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प है। लालचंद बताते हैं कि उनके पोते-पोतियां अक्सर उनसे कहते थे—दादा जी, आप आगे क्यों नहीं पढ़े? आप तो अपने बेटों से भी कम पढ़े-लिखे हैं। यही बात लालचंद के दिल को लग गई और उन्होंने इन तानों को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने 2012 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा और 2023 में इग्नू से BA की डिग्री हासिल की। अब साल 2026 में 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने MA भी पास कर ली है। लालचंद का कहना है कि अब उनका सपना पीएचडी या लॉ की पढ़ाई करने का है और इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। लालचंद गोदारा कहते हैं कि जब उन्हें पढ़ाई की अहमियत का एहसास हुआ, तब उनकी उम्र करीब 76 साल हो चुकी थी। सैनिक रहते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए सीने पर गोली खाने की हिम्मत दिखाई, लेकिन उनके मुताबिक कम पढ़े-लिखे होने का ताना उन्हें उससे भी ज्यादा दर्द देता था। तभी उन्होंने ठान लिया कि उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, पढ़ाई जरूर करेंगे। लालचंद गोदारा का जीवन सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा। साल 1962 में वे सेना में भर्ती हुए और उन्होंने 1962, 1965 और 1971 की लड़ाइयों में सैनिक के रूप में हिस्सा लिया। सेना में सेवाएं देने के बाद साल 1972 में रोडवेज विभाग में ड्राइवर के पद पर भर्ती हुए और 2002 में यार्ड मास्टर के पद से रिटायर हुए। रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने खुद को रुकने नहीं दिया। खेलों में भी लालचंद गोदारा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करीब 200 पदक अपने नाम किए हैं। इनमें लगभग 150 गोल्ड, 30 सिल्वर और 20 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं।
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