
एशियन गेम्स में खटीमा के कपिल का दमदार पंच,🥊 भारत की झोली में कांस्य पदक, मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई।
चकरपुर-महतगांव के हवलदार कपिल पोखरिया ने 90 किग्रा वर्ग में रचा गौरव, सेमीफाइनल तक पहुंचकर देश-प्रदेश का बढ़ाया मान; सीएम धामी ने दी बधाई
खटीमा। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में उत्तराखंड के खटीमा के चकरपुर-महतगांव निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज हवलदार कपिल पोखरिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। पुरुषों के 90 किलोग्राम भारवर्ग में कपिल ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। सेमीफाइनल मुकाबले में उनका सामना उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज तुराबेक खाबीबुल्लाएव से हुआ, जहां कपिल को 1-4 के स्प्लिट डिसीजन से हार का सामना करना पड़ा। सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही कपिल का कांस्य पदक पहले ही पक्का हो गया था।
कपिल की इस उपलब्धि से खटीमा से लेकर पूरे उत्तराखंड में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कपिल को एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।
राष्ट्रीय मंच से अंतरराष्ट्रीय रिंग तक चमका कपिल
कपिल वर्तमान में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण ले रहे हैं और भारतीय सेना से जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2025 और 2026 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा वह कॉमनवेल्थ गेम्स में क्वार्टर फाइनल तक पहुंच चुके हैं। यूरोप में आयोजित ग्रीक चैंपियनशिप में भी उन्होंने रजत पदक हासिल किया है।
आक्रामक अंदाज से बदली रणनीति, बैक फुट पर काउंटर पंच बना हथियार
कपिल के कोच किशन केलवाल के मुताबिक कपिल स्वभाव से आक्रामक मुक्केबाज हैं। पहाड़ी क्षेत्र से आने के कारण उनमें ताकत और दमखम भरपूर है। हाल के प्रशिक्षण में उनके खेल की तकनीक और रणनीति पर विशेष काम किया गया।
पहले कपिल लगातार आगे बढ़कर पंच लगाने की रणनीति पर ज्यादा निर्भर रहते थे, लेकिन अब उनके खेल में बदलाव किया गया है। उन्हें बैक फुट पर रहकर प्रतिद्वंद्वी के हमले को डिफेंड करने और सही मौके पर काउंटर पंच लगाने की तकनीक पर तैयार किया गया। एशियन गेम्स में भी उनकी यह रणनीति प्रभावी नजर आई।
2012 में शुरू किया मुक्केबाजी का सफर, 2019 में सेना में हुए शामिल
कपिल के बेसिक कोच पूरन बोरा के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2012 में कपिल को मुक्केबाजी का प्रशिक्षण देना शुरू किया था। वर्ष 2017 तक कपिल ने उनके साथ कई प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया। इसके बाद वह आगे के प्रशिक्षण के लिए काशीपुर चले गए, जहां से उनके खेल करियर ने राष्ट्रीय स्तर पर नई रफ्तार पकड़ी।
वर्ष 2019 में सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में पदक जीतने के बाद कपिल कुमाऊं रेजिमेंट में शामिल हुए। सेना में रहते हुए भी उन्होंने मुक्केबाजी का अभ्यास जारी रखा और लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया।
खटीमा के बेटे की उपलब्धि पर गर्व
जापान में एशियन गेम्स के मंच पर कांस्य पदक जीतने वाले कपिल पोखरिया की उपलब्धि ने उनके परिवार, कोच, सेना और खटीमा के खेल प्रेमियों को गौरवान्वित किया है। एक छोटे से क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय रिंग तक पहुंचे कपिल ने अपनी मेहनत, अनुशासन और जज्बे के दम पर यह साबित किया है कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन हौसला और मेहनत बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते।
कपिल का यह कांस्य पदक केवल एक मेडल नहीं, बल्कि खटीमा और उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा की एक नई कहानी है।
Uttarakhand live 24 Harrish H Mehraa @topfans
#KapilPokhariya #KapilPokhariyaBoxer #AsianGames2026 #AsianGames #Boxing #BronzeMedal #TeamIndia #IndianBoxing #Uttarakhand #Khatima #KhatimaNews #Chakarpur #Mahatgaon #DevbhoomiUttarakhand #UttarakhandPride #ArmyBoxer #IndianArmy #BoxingIndia #CMDhami #PushkarSinghDhami #उत्तराखंड #खटीमा #कपिल_पोखरिया #एशियन_गेम्स #मुक्केबाजी #कांस्य_पदक #देवभूमि_का_गौरव #भारत_का_गौरव