यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा अज़ीम मुजाहिद-ए-आज़ादी (स्वतंत्रता सेनानी) मौलाना मोहम्मद अली जौहर को मुल्क के बंटवारे का ज़िम्मेदार ठहराने पर सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने सख्त ऐतराज़ जताया है। उन्होंने इसे योगी की 'कम इल्मी' (अज्ञानता) और इतिहास को सियासी चश्मे से देखने की मिसाल करार दिया है।
चंद्रशेखर आज़ाद ने हकीकत याद दिलाते हुए कहा कि मौलाना जौहर ने अंग्रेज़ों के खिलाफ बेखौफ जंग लड़ी और साफ कहा था कि वो गुलाम हिंदुस्तान वापस नहीं जाएंगे। 1931 में लंदन में उनका इंतकाल हो गया था, जबकि 'पाकिस्तान' बनाने की बात इसके दो साल बाद 1933 में शुरू हुई और मुल्क का बंटवारा 1947 में हुआ।
आज़ाद ने सवाल उठाया कि जो शख्स 1931 में ही दुनिया से रुखसत हो गया, उसे बंटवारे का ज़िम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? उन्होंने सीएम योगी पर करारा तंज कसते हुए कहा- "मालूमात का टोटा, बयानात की भरमार!" (जानकारी कम, बयानबाज़ी ज़्यादा)। उन्होंने नसीहत दी कि तारीख को सियासी फायदे के लिए नहीं, बल्कि हकीकत की बुनियाद पर पढ़ा जाना चाहिए।