अगर आज दुनिया का पूरा इंटरनेट, करोड़ों किताबें, तस्वीरें और ज़रूरी दस्तावेज़ एक ऐसी चीज़ में सुरक्षित रख दिए जाएँ जो आग, समय और गर्मी से लगभग बेअसर रहे, तो कैसा होगा? वैज्ञानिक अब इसी दिशा में काम कर रहे हैं।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथैम्प्टन के वैज्ञानिकों ने एक खास 5D ऑप्टिकल मेमोरी क्रिस्टल विकसित किया है। यह कोई साधारण हार्ड डिस्क या SSD नहीं है। इसमें डेटा को लेज़र की मदद से काँच जैसे बेहद मज़बूत फ्यूज़्ड क्वार्ट्ज के अंदर बेहद सूक्ष्म स्तर पर लिखा जाता है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्षमता है। एक ही क्रिस्टल में लगभग 360 टेराबाइट, यानी करीब 3 लाख 60 हज़ार गीगाबाइट तक डेटा सुरक्षित रखा जा सकता है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह क्रिस्टल 1000 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सह सकता है। साथ ही यह अत्यधिक ठंड, तेज़ दबाव और विकिरण जैसी कठिन परिस्थितियों में भी डेटा को सुरक्षित रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सही परिस्थितियों में इसमें रखा गया डेटा अरबों वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है। ध्यान रहे, यह अनुमान प्रयोगों और वैज्ञानिक गणनाओं पर आधारित है। किसी क्रिस्टल को वास्तव में अरबों वर्षों तक परखा नहीं गया है।
फिलहाल यह तकनीक आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसका उद्देश्य रोज़मर्रा की हार्ड डिस्क को बदलना नहीं, बल्कि मानव इतिहास, वैज्ञानिक शोध, सांस्कृतिक विरासत और जीनोम जैसी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी को बहुत लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।
यानी भविष्य में हमारी सबसे कीमती जानकारी किसी सर्वर में नहीं, बल्कि एक छोटे-से पारदर्शी क्रिस्टल के अंदर सुरक्षित हो सकती है… जो समय की सबसे कठिन परीक्षा भी झेल सके।
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