
बेतिया में SDPO समेत चार नामजद और करीब एक दर्जन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय में परिवाद...
बेतिया सदर-1 के SDPO अजीत कुमार समेत चार नामजद लोगों और करीब एक दर्जन अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग को लेकर न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। मामला परिवाद संख्या 1853/2026 से संबंधित है। परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2), 115(2), 352, 127(2), 61(2) और 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। परिवाद दाखिल करने वाले साधु शरण उपाध्याय पेशे से अधिवक्ता बताए गए हैं। उन्होंने अपने परिवाद में पुलिस पदाधिकारियों एवं अन्य आरोपितों पर जबरन घर से उठाकर ले जाने, मारपीट, अभद्र व्यवहार, अवैध हिरासत में रखने, धमकी देने तथा जमीन विवाद में एक पक्ष को कथित रूप से लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। परिवाद के अनुसार, परिवादी साधु शरण उपाध्याय के परिवार और अभियुक्त संख्या चार प्रदीप कुमार के परिवार के बीच जमीन को लेकर पूर्व से विवाद चला आ रहा है। परिवाद में बताया गया है कि परिवादी के पुत्र शशि भूषण कुमार उपाध्याय ने अपने फुफेरे भाई ललन पांडे से जमीन का बैनामा कराया था। उक्त जमीन पर भवन निर्माण का कार्य कराया जा रहा था और निर्माण कार्य में केवल ढलाई का काम बाकी था। परिवादी का आरोप है कि 18 सितंबर की शाम करीब पांच बजे अभियुक्त संख्या एक बेतिया सदर-1 के SDPO अजीत कुमार उनके घर पहुंचे और निर्माण कार्य बंद करने की धमकी दी। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि SDPO ने परिवादी और उनके पुत्र शशि भूषण कुमार उपाध्याय को लेकर कथित तौर पर कहा कि वे उनका वकालत छुड़वा देंगे और उन्हें जेल भिजवाने की व्यवस्था कर दी गई है। परिवाद में आगे कहा गया है कि इस दौरान परिवादी ने अभियुक्त प्रदीप कुमार से विवाद और धमकी देना छोड़ने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद प्रदीप कुमार ने कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी दी तथा वहां से चला गया। इसके बाद 20 सितंबर की शाम करीब पांच बजे की घटना का उल्लेख परिवाद में किया गया है। परिवादी के अनुसार, वह अपने घर के दरवाजे पर मौजूद थे, तभी सभी नामजद आरोपित अन्य पुलिसकर्मियों के साथ वहां पहुंचे और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि SDPO अजीत कुमार ने परिवादी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए निर्माण कार्य बंद करने का आदेश दिया और कथित तौर पर कहा कि प्रदीप कुमार उनका दूर का रिश्तेदार है तथा निर्माण कार्य बंद नहीं करने पर उन्हें बर्बाद कर दिया जाएगा। परिवादी के अनुसार, उन्होंने SDPO से कहा कि यदि किसी न्यायालय ने उक्त स्थल पर निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया है तो उन्हें संबंधित न्यायालय का आदेश दिखाया जाए। परिवाद में दावा किया गया है कि इस बात पर SDPO अजीत कुमार नाराज हो गए और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों से परिवादी को पकड़कर थाना ले जाने को कहा। इसके बाद परिवाद में आरोप लगाया गया है कि बेतिया सदर-1 के SDPO अजीत कुमार और मझौलिया थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक विवेक कुमार ने अन्य पुलिसकर्मियों की सहायता से परिवादी साधु शरण उपाध्याय तथा गवाह बाल भूषण दुबे और विभाकर उपाध्याय को कथित तौर पर जबरन गाड़ी में बैठाया और थाना ले गए। परिवाद में उनके साथ मारपीट एवं अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। परिवाद में कहा गया है कि बाद में पुलिस अवर निरीक्षक विवेक कुमार द्वारा गवाह अंशु कुमार दुबे और विभाकर उपाध्याय को रात करीब दस बजे छोड़ दिया गया। वहीं गवाह बाल भूषण दुबे को अगले दिन 21 सितंबर की रात करीब आठ बजे छोड़े जाने का दावा किया गया है। परिवादी ने आरोप लगाया है कि उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया। परिवाद के अनुसार, 21 सितंबर की शाम करीब 6:30 बजे मझौलिया थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। परिवादी का दावा है कि उक्त FIR में प्रारंभिक रूप से उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया गया था, लेकिन बाद में उन्हें गलत एवं नाजायज तरीके से अभियुक्त बनाकर माननीय अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम, बेतिया के आवास पर रिमांड के लिए पेश किया गया। परिवाद में आगे दावा किया गया है कि माननीय अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम, बेतिया द्वारा FIR में परिवादी के खिलाफ आरोप नहीं पाए जाने के बाद उन्हें PR बॉन्ड पर छोड़ दिया गया। परिवादी ने इसे अपने खिलाफ की गई कथित कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए न्यायालय से आरोपित पुलिस पदाधिकारियों एवं अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साधु शरण उपाध्याय की ओर से दाखिल परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सभी अभियुक्तों ने कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र के तहत उन्हें तथा गवाहों को अपमानित करने और नाजायज फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया। परिवाद में यह भी कहा गया है कि परिवादी द्वारा बार-बार गिरफ्तारी का आधार पूछे जाने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर न तो लिखित और न ही मौखिक रूप से गिरफ्तारी का कारण बताया गया। परिवादी ने आरोप लगाया है कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें कथित तौर पर नाजायज हिरासत में रखा गया। साथ ही आरोप लगाया गया है कि उन्हें बिना उचित आधार के जेल भेजने का प्रयास किया गया, जिसके कारण उन्हें मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। परिवाद में नामजद अभियुक्तों में सबसे पहले बेतिया सदर-1 के SDPO अजीत कुमार, दूसरे नंबर पर मझौलिया थाना के थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक अमर कुमार, तीसरे नंबर पर मझौलिया थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक विवेक कुमार तथा चौथे नंबर पर मझौलिया निवासी प्रदीप कुमार का नाम दर्ज होने की बात कही गई है। इसके अलावा करीब एक दर्जन अज्ञात पुलिसकर्मियों को भी अभियुक्त बनाए जाने का उल्लेख है। पूरे मामले की पृष्ठभूमि जमीन विवाद से जुड़ी बताई गई है। परिवादी का आरोप है कि इसी विवाद के चलते पुलिस पदाधिकारियों द्वारा उनके एवं उनके परिजनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं परिवाद में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायालय में होने वाली कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। फिलहाल, परिवाद संख्या 1853/2026 न्यायालय में दाखिल किए जाने के बाद मामले ने पुलिस कार्रवाई और जमीन विवाद को लेकर एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। परिवादी ने नामजद पुलिस पदाधिकारियों, अन्य आरोपित व्यक्ति और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ उल्लेखित धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। मामले में न्यायालय की आगामी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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