रंग लाई मुहिम: अंधियारी रातों में फिर जगमगाने लगे जुगनू
इंडोनेशिया में विकास की तेज दौड़ के बीच विलुप्त होती जुगनुओं की प्रजातियों को बचाने के लिए जुगनू संरक्षण केंद्र नई उम्मीद बन रहा है। बाली द्वीप के तारो गांव में जुगनुओं के संरक्षण की मुहिम रंग ला रही है। यहां बचपन की यादों में बसे जुगनुओं को फिर से आबाद करने के लिए दिन-रात प्रयास किए जा रहे हैं।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में जुगनुओं की करीब 10 फीसदी प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। जुगनू पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इनके अस्तित्व के लिए स्वच्छ जल स्रोत तथा प्रदूषण रहित वातावरण जरूरी है।
संरक्षण केंद्र की टीम आधुनिक तकनीकों के जरिए जुगनुओं की आबादी बढ़ाने में जुटी है। विशेषज्ञों ने इसके लिए विशेष उपकरण विकसित किए हैं। केंद्र में जुगनुओं की टिमटिमाहट से रात का वातावरण फिर रोशन होने लगा है।
एक जुगनू की उम्र महज 22 दिन होती है, जबकि उसे पूर्ण वयस्क बनने में करीब छह माह से दो साल तक लग सकते हैं। संरक्षण केंद्र में प्रयोगशाला में पली-बढ़ी मादा जुगनुओं का मिलन जंगल से लाए गए नर जुगनुओं से कराया जाता है और अंडों को एकत्र कर इनक्यूबेटर में संरक्षित किया जाता है।
2018 में स्थापित यह केंद्र इंडोनेशिया का पहला जुगनू संरक्षण केंद्र है।
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