हम उस वंश के ठाकुर हैं, लाला—
जिसकी विरासत सिर्फ नाम और शान की नहीं, बल्कि त्याग, बलिदान और स्वाभिमान की रही है।
उस वंश की माताओं ने अपने लाल खोए हैं,
बहनों ने भाइयों की कुर्बानी देखी है,
पत्नी ने अपने सुहाग खोए हैं,
और वीरांगनाओं ने अपनी आन-बान की रक्षा के लिए इतिहास में अमिट अध्याय लिखे हैं।
हम उन पूर्वजों के वंशज हैं, जिन्होंने जरूरत पड़ी तो अपनी रियासत तक त्याग दी, लेकिन अपने सम्मान और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
आज उंगली उठाने से पहले,
आज आरोप लगाने से पहले,
एक बार इतिहास के पन्ने पलटकर देख लेना, लाला।
हमारी खामोशी को कमजोरी मत समझना।
हमारी सहनशीलता को मजबूरी मत समझना।
सम्मान देना हमारी परंपरा है और अपने सम्मान की रक्षा करना हमारी विरासत।
इसलिए शब्दों की मर्यादा बनाए रखिए—
क्योंकि इतिहास केवल पढ़ा नहीं जाता,
कभी-कभी इतिहास की विरासत वर्तमान में भी दिखाई देती है।