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MD Akhtrul IsIam

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आपदा जोखिम न्यूनीकरण को लेकर 20 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों का एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम
सुपौल। आपदा के संभावित जोखिमों को कम करने तथा ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से बुधवार को जिला परिषद सभागार, सुपौल में Community Based Disaster Risk Reduction (CBDRR) कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सुपौल, किशनपुर, सरायगढ़-भपटियाही एवं मरौना प्रखंड अंतर्गत कुल 20 ग्राम पंचायतों में निर्धारित गतिविधियों के प्रभावी संचालन को लेकर संबंधित पदाधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों को आवश्यक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर आपदा के जोखिमों की पहचान, संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारी तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर पंचायतों की क्षमता को विकसित करना रहा। उन्मुखीकरण के दौरान आपदा जोखिम न्यूनीकरण की गतिविधियों को समुदाय तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और पंचायत स्तर पर समन्वित प्रयास सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में मो. तारिक, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), सुपौल ने उपस्थित प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन की तैयारियों और जोखिम न्यूनीकरण की आवश्यकता से अवगत कराया। उन्होंने पंचायत स्तर पर आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर गयानंद यादव, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सुपौल, काली चरण, अपर जिला पंचायत राज पदाधिकारी, सुपौल, संबंधित प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, नोडल पदाधिकारी जिला पंचायत संसाधन केंद्र, सुपौल, राज्य स्तरीय प्रशिक्षक, जिला समन्वयक GPSVS-BIAG-UNICEF सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।
उन्मुखीकरण कार्यक्रम में चयनित ग्राम पंचायतों के मुखिया, पंचायत सचिव एवं संबंधित कार्यपालक सहायक भी शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान पंचायत स्तर पर आपदा जोखिम को समझने, समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आपदा से पहले आवश्यक तैयारियां करने से संबंधित विषयों पर प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा आने के बाद राहत एवं बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा से पहले जोखिम की पहचान, तैयारी, जागरूकता और स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अधिकारियों ने पंचायत स्तर पर संचालित होने वाली निर्धारित गतिविधियों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। साथ ही संबंधित पंचायतों में कार्यक्रम के उद्देश्यों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कर्मियों के बीच समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई।
एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम के माध्यम से चयनित 20 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों एवं कर्मियों को समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण की अवधारणा से जोड़ने और पंचायत स्तर पर आपदा प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने निर्धारित गतिविधियों के संचालन में सहयोग एवं सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
डीएम सावन कुमार ने ओबीसी कन्या आवासीय विद्यालय का किया निरीक्षण, छात्राओं से संवाद कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा
सुपौल। जिलाधिकारी सावन कुमार ने बुधवार को अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालय, रामनगर, पिपरा का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं, भोजन, स्वच्छता एवं डिजिटल क्लास सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया। डीएम ने विद्यालय की कक्षाओं में पहुंचकर छात्राओं से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से उनकी पढ़ाई, विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं तथा किसी प्रकार की परेशानी के संबंध में जानकारी प्राप्त की। छात्राओं से बातचीत करते हुए उन्होंने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षकों को निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार नियमित एवं प्रभावी तरीके से कक्षाओं का संचालन करने को कहा गया।
डीएम ने विद्यालय में संचालित डिजिटल क्लास की व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को डिजिटल क्लास का नियमित और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था का छात्राओं को अधिक से अधिक लाभ मिलना चाहिए।
विद्यालय में छात्राओं को उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की व्यवस्था की भी जिलाधिकारी ने समीक्षा की। उन्होंने संबंधित एजेंसी जीविका के पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सारणी के अनुसार छात्राओं को समय पर भोजन उपलब्ध कराया जाए। साथ ही भोजन की गुणवत्ता एवं पौष्टिकता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि छात्राओं को संतुलित एवं स्वास्थ्यवर्धक भोजन मिल सके।
विद्यालय परिसर में साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी डीएम ने आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जीविका को विद्यालय परिसर में नियमित रूप से साफ-सफाई कराने तथा छात्राओं के लिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखने को कहा। विद्यालय के कमरों, परिसर एवं अन्य स्थानों पर स्वच्छता व्यवस्था को व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने विद्यालय की समस्त व्यवस्थाओं को बेहतर एवं सुव्यवस्थित बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विद्यालय प्रशासन और संबंधित पदाधिकारियों को छात्राओं के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
निरीक्षण के दौरान जिला कल्याण पदाधिकारी, सुपौल, जिला कल्याण पदाधिकारी (BC एवं EBC), विद्यालय के शिक्षक एवं कर्मी सहित अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।
सदर अस्पताल में मनाया गया बेटी जन्मोत्सव, नवजात बेटियों को बेबी किट और माताओं को दिए गए फलदार पौधे
सुपौल। सदर अस्पताल, सुपौल में बुधवार को बेटी जन्मोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करना, बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना तथा मातृ एवं शिशु पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम का आयोजन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, आईसीडीएस, सुपौल की अध्यक्षता में किया गया।
बेटी जन्मोत्सव के दौरान सदर अस्पताल में जन्म लेने वाली नवजात बेटियों और उनकी माताओं को सम्मानित किया गया। नवजात बेटियों को बेबी किट प्रदान की गई, जबकि उनकी माताओं को फलदार पौधा देकर बेटी के जन्म की खुशी को यादगार बनाया गया। इस पहल के माध्यम से बेटी के जन्म को बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशी एवं सम्मान का अवसर बनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में डीपीएम, जिला स्वास्थ्य समिति, जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम, जिला मिशन समन्वयक, जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन (DHEW), अस्पताल प्रबंधक, जिला समन्वयक एनएनएम, केंद्र प्रशासक सखी वन स्टॉप सेंटर, लैंगिक विशेषज्ञ एवं लेखा सहायक सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के बाद जिला मिशन समन्वयक DHEW हरिनारायण कुमार, लैंगिक विशेषज्ञ नितु कुमारी एवं मोहम्मद तारीक सिद्धकी ने सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने नवजात शिशुओं की माताओं से संवाद कर शिशु के पोषण, स्तनपान और देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
माताओं को बताया गया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाना चाहिए। इस अवधि में बच्चे को पानी सहित किसी अन्य खाद्य पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती। छह माह की आयु पूर्ण होने के बाद स्तनपान जारी रखते हुए बच्चे को उचित ऊपरी आहार देना शुरू करना चाहिए। माताओं को शिशु की साफ-सफाई, पोषण और नियमित देखभाल को लेकर भी जागरूक किया गया।
इस दौरान महिलाओं और बालिकाओं के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों एवं कर्मियों ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY), मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बारे में माताओं को बताया। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक जानकारी और प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से बेटी के जन्म पर परिवार में खुशी का माहौल बनाने, लिंग आधारित भेदभाव को कम करने और बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। साथ ही माताओं को अपने नवजात बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए जागरूक रहने की अपील की गई।
अधिकारियों ने कहा कि बेटियों के जन्म को सम्मान देने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की दिशा में परिवार एवं समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है। बेटी जन्मोत्सव जैसे कार्यक्रम इसी सोच को मजबूत करने में सहायक हैं।
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जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में साप्ताहिक समीक्षा बैठक, योजनाओं के त्वरित निष्पादन का निर्देश
सुपौल समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में सोमवार को जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय साप्ताहिक सोमवारीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
समीक्षा के क्रम में न्यायालय वादों, दाखिल-खारिज, जिला जनता दरबार, जन संवाद, राशन कार्ड, एनीमिया अभियान तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना समेत विभिन्न योजनाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन की अद्यतन जानकारी लेते हुए लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर जोर दिया।
बैठक में सहयोग पोर्टल पर ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों के निष्पादन की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी सावन कुमार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पोर्टल के माध्यम से प्राप्त आवेदनों का ससमय, गुणवत्तापूर्ण एवं नियमानुसार निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं करने को कहा।
बैठक में उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार, अपर समाहर्त्ता सच्चिदानंद सुमन, अपर समाहर्त्ता-सह-जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी विकाश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी गयानंद यादव, विशेष कार्य पदाधिकारी विकास कुमार कर्ण, वरीय उप समाहर्त्ता पुष्पा कुमारी सहित अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
वहीं, जिले से बाहर अथवा अन्य स्थानों पर पदस्थापित संबंधित पदाधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को विभागीय कार्यों की नियमित समीक्षा करते हुए जनहितकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
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बाढ़ सुरक्षा को लेकर अपर समाहर्ता ने स्पर 62.95 और 64.95 का किया निरीक्षण, सुरक्षात्मक कार्य शीघ्र पूरा करने का निर्देश
सुपौल। जिले में बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से बाढ़ सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन को लेकर लगातार निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को अपर समाहर्ता (आपदा), सुपौल द्वारा बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्पर संख्या 62.95 एवं 64.95 का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान जल संसाधन विभाग (WRD) के कार्यपालक अभियंता एवं ADMO सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता ने दोनों स्परों की वर्तमान स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने स्परों की मजबूती, सुरक्षा व्यवस्था तथा संभावित कटाव की स्थिति का स्थल पर निरीक्षण किया। अधिकारियों से स्परों की वर्तमान स्थिति और अब तक किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की जानकारी भी ली गई। साथ ही बाढ़ के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों को लेकर विभागीय तैयारियों की समीक्षा की गई।
अपर समाहर्ता ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक कटाव रोधी एवं सुरक्षात्मक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर एवं स्परों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्परों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। विशेष रूप से जलस्तर में वृद्धि, नदी के बहाव में बदलाव अथवा कटाव की स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। अपर समाहर्ता ने स्पष्ट किया कि बाढ़ के दौरान किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से तैयार रखी जाएं।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि संवेदनशील स्थलों पर नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए तथा यदि कहीं भी कटाव या संरचना में कमजोरी के संकेत मिलते हैं तो तत्काल इसकी सूचना वरीय अधिकारियों को देते हुए आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही मौके पर उपलब्ध संसाधनों और आपदा के समय इस्तेमाल होने वाली व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त रखने पर जोर दिया गया।
प्रशासन की ओर से बाढ़ सुरक्षा को लेकर किए जा रहे इस निरीक्षण का उद्देश्य संवेदनशील तटवर्ती एवं स्पर क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखना और संभावित बाढ़ एवं कटाव से निपटने के लिए समय रहते आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करना है।
अपर समाहर्ता ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ सुरक्षा कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने भी बाढ़ सुरक्षा से संबंधित तैयारियों को लेकर अपनी स्थिति से अपर समाहर्ता को अवगत कराया।
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सुपौल जिला अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं सशक्तिकरण के उद्देश्य से "पुलिस दीदी" पहल के तहत विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। पुलिस दीदी द्वारा प्रतिदिन विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा सार्वजनिक स्थलों पर जाकर छात्राओं एवं महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों, साइबर अपराधों से बचाव, महिला हेल्पलाइन, आपातकालीन सेवाओं तथा विभिन्न कानूनी प्रावधानों के संबंध में जागरूक किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस दीदी द्वारा नियमित गश्ती एवं जनसंपर्क के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ किया जा रहा है। विद्यालयों में आयोजित संवाद कार्यक्रमों के दौरान छात्र-छात्राओं को सामाजिक कुरीतियों, बाल विवाह, नशा मुक्ति, लैंगिक समानता तथा सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के संबंध में भी जानकारी प्रदान की जा रही है।

पुलिस दीदी का यह प्रयास समाज में जागरूकता बढ़ाने, महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति होने वाले अपराधों की रोकथाम करने तथा पुलिस और आमजन के बीच विश्वास एवं सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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