#बालाघाट
ढेंचा की हरी खाद से बदली खेती की तस्वीर, टवेझरी के किसान बने मिसाल
सतत कृषि और मिट्टी के स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने की दिशा में कृषि कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, बालाघाट के प्रयास रंग लाने लगे हैं। विकासखंड बालाघाट के ग्राम टवेझरी के प्रगतिशील किसान विवेकानंद डोंगरे ने रासायनिक खेती से हटकर हरी खाद आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाकर अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कृषि विस्तार अधिकारी अभिलाष सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में श्री डोंगरे ने विभाग से सस्बेनिया रोस्ट्राटा (ढेंचा) का बीज प्राप्त कर अपने खेत में इसकी बुवाई की। फसल में फूल आने से पहले उन्होंने रोटावेटर की सहायता से ढेंचा को खेत में ही मिलाकर हरी खाद के रूप में उपयोग किया। इस तकनीक से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ी है और प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की उपलब्धता में भी वृद्धि हुई है, जिससे मुख्य फसल के लिए खेत बेहतर ढंग से तैयार हो गया।
श्री डोंगरे के खेत में हरी खाद के सकारात्मक परिणाम देखने के बाद टवेझरी गांव के अन्य किसान भी इस पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। किसान अब रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च को कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए ढेंचा की खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
कृषि विस्तार अधिकारी अभिलाष सूर्यवंशी ने बताया कि हरी खाद खेती की लागत घटाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का प्रभावी और टिकाऊ उपाय है। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक जैविक एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे न केवल उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी कृषि भूमि की उर्वरता सुरक्षित रह सकेगी।
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Balaghat, Madhya Pradesh | Jul 19, 2026