हाथ गंदे हुए… लेकिन संदेश बहुत साफ है! 👏
इसे कोई सियासी स्टंट कहे, कोई नाटक कहे या फिर इसे राजनीति के चश्मे से देखे—जिसे जो कहना है, कह सकता है।
लेकिन जरा इस तस्वीर को गौर से देखिए…
एक ऐसा काम, जिसे करने से आम आदमी भी कतराता है, उसे मनीष मिश्रा ने अपने हाथों से किया।
किसी की थूक, पान की पीक और सार्वजनिक जगह पर फैली गंदगी को देखकर हम अक्सर नाक-भौं सिकोड़कर आगे निकल जाते हैं।
लेकिन सवाल यह है—
अगर वही गंदगी आपके सामने हो और उसे साफ करने के लिए आपको अपने हाथ बढ़ाने पड़ें, तब स्वच्छता का असली मतलब समझ में आएगा।
मनीष मिश्रा ने सिर्फ पान की पीक साफ नहीं की…
उन्होंने एक सवाल छोड़ दिया है—
“जिस गंदगी को फैलाने में हमें एक सेकंड लगता है, उसे साफ करने की जिम्मेदारी लेने में हम पीछे क्यों हट जाते हैं?”
सियासत होगी तो अपनी जगह होती रहेगी।
आलोचना होगी तो वह भी होती रहेगी।
लेकिन जो अच्छा काम है, उसकी तारीफ करने में भी कंजूसी क्यों?
आज अगर किसी ने अपने हाथ गंदे करके समाज को स्वच्छता का संदेश दिया है, तो कम से कम इतना तो कहना ही पड़ेगा—
शानदार भाई 👏❤️
क्योंकि हाथों पर लगी गंदगी कुछ देर में धुल जाएगी, लेकिन समाज को दिया गया संदेश लंबे समय तक याद रह सकता है।
मनीष मिश्रा जी को इस मानवीय और सराहनीय पहल के लिए बारंबार साधुवाद एवं अभिनंदन। 💐
आप इस तस्वीर को क्या नाम देंगे—सियासी स्टंट, नाटक या समाज के लिए एक छोटा लेकिन बड़ा संदेश?
अपनी राय कमेंट में जरूर लिखिए। 👇
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Basti, Basti | Oct 4, 2026