कलयुग के अंत का महारहस्य जोशीमठ के समीप 'भविष्य बद्री' धाम में स्वतः प्रकट हो रहे हैं साक्षात भगवान नारायण।
चमोली देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों और हिमालय की अगाध गहराइयों में बसा एक ऐसा पावन तीर्थस्थल इस समय देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है, जिसे शास्त्रों में 'भविष्य का बद्रीनाथ' यानी भविष्य बद्री धाम कहा गया है। समुद्र तल से लगभग 9,000 फीट (2744 मीटर) की ऊंचाई पर, जोशीमठ से करीब 17 से 25 किलोमीटर की दूरी पर घने देवदार के जंगलों के बीच सुभाई गांव में यह चमत्कारी स्थल स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और विस्मयकारी रहस्य यह है कि यहाँ गर्भगृह में मौजूद एक प्राकृतिक पवित्र शिलाखंड (पत्थर) पर भगवान विष्णु का चतुर्भुज रूप स्वतः ही धीरे-धीरे उभर रहा है।
स्थानीय पुजारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, समय के साथ इस पाषाण शिला पर प्रभु के नेत्र, मुकुट और शेषनाग की आकृतियां प्राकृतिक रूप से साफ दिखाई देने लगी हैं, जो किसी मानवीय कलाकृति का परिणाम नहीं बल्कि एक पूर्णतः स्वयंभू दैवीय चमत्कार है।
स्कंद पुराण और आदिगुरु शंकराचार्य की अकाट्य भविष्यवाणी।
सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों और स्कंद पुराण के केदारखंड में इस स्थान का अत्यंत महिमामयी संदर्भ मिलता है। पौराणिक मान्यताओं और आदिगुरु शंकराचार्य की भविष्यवाणियों के अनुसार, वर्तमान कलयुग के अंतिम चरण में जब संसार में पाप और अधर्म अपनी चरम सीमा पार कर जाएगा, तब जोशीमठ के प्रसिद्ध नृसिंह मंदिर में स्थापित भगवान नृसिंह की शालिग्राम मूर्ति की पतली होती जा रही कलाई अंततः खंडित होकर गिर जाएगी।
उस भयावह प्राकृतिक कालखंड में विष्णुप्रयाग के समीप स्थित 'जय' और 'विजय' नाम के दो विशाल पर्वत आपस में टकराकर जमींदोज हो जाएंगे, जिससे वर्तमान बद्रीनाथ धाम का मुख्य मार्ग हमेशा-हमेशा के लिए अवरुद्ध और पूरी तरह अगम्य हो जाएगा।
मार्ग बंद होने के पश्चात, भगवान बद्री विशाल मुख्य धाम को छोड़कर इसी पावन तपोभूमि 'भविष्य बद्री' में साक्षात चतुर्भुज रूप में अवतरित होंगे और कलयुग के अंत के बाद यहीं से कल्कि अवतार के माध्यम से पुनः नए सतयुग की शुरुआत होगी। वर्तमान समय में जहाँ चारधाम यात्रा के समापन पर मुख्य बद्रीनाथ के कपाट सर्दियों में बंद हो जाते हैं, वहीं यह दिव्य भविष्य बद्री धाम वर्ष के बारह महीने श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुला रहता है, जो इस धरा के 'द्वितीय भू-बैकुंठ' के रूप में अपनी आध्यात्मिक आभा बिखेर रहा है।"उत्तराखंड की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Nandi News Uttarakhand को Follow करें।"
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