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जिस यूनिवर्सिटी ने कारवाई थी FIR दर्ज उसी यूनिवर्सिटी में जजपा नेता दिग्विजय चौटाला ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में लिया दाखिला,आज लगाई क्लास

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026

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रक्तदान एवं मेडिकल कैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न, 84 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान, 35 लोगो ने करवाया मेडिकल चेकअप, 25 लोगो ने BMD ( हड्डियों की जांच) करवाई 

समाना बाहू, करनाल, 16 अगस्त 2026 समाना बाहू में आयोजित रक्तदान एवं मेडिकल कैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। मिथुन सामना ने बताया इस रक्तदान शिविर में शिविर में 84 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानवता की सेवा में अपना योगदान दिया, जबकि 35 लोगों ने मेडिकल कैंप में स्वास्थ्य जांच करवाकर निःशुल्क दवाइयाँ प्राप्त कीं। 25 लोगो ने बीएमडी (हड्डियों की जांच) का टेस्ट करवाया  इस रक्तदान शिविर में समाना बाहु गांव के हर्ष, हरविंदर, राहुल, दलबीर, सुमित आदि सहित समस्त ग्रामवासी का विशेष सहयोग रहा। सुमित खत्री ने बताया यह रक्तदान शिविर थैलासीमिया ग्रस्त बच्चों दुर्घटना ग्रस्त लोगों वह गर्भवती महिलाओं के इस्तेमाल में लाया जाएगा  रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को प्रशंसा पत्र दिए गए। मित्र जनसेवा एव सेवा समिति कुरुक्षेत्र के सदस्यों ने इस शिविर में रक्तदान कर अच्छी भूमिका अदा करी। इस अवसर पर सुमित खत्री, दलबीर, हर्ष, हरदीप, रिंकू पधाना, अमित पाल , परवीन पाल, राज कुमार, सुशील,रोहित,हरविंदर सहित 99 रक्तदाताओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया व 84 रक्तदत्ताओ ने रक्तदान किया। शिविर के दौरान सुमित खत्री ने 58वीं बार रक्तदान करते हुए लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी रक्तदाताओं, मेडिकल टीम, सहयोगियों एवं शिविर में पहुंचकर इस नेक कार्य को सफल बनाने वाले सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मिथुन समाना बाहू एवं समस्त ग्रामवासियों सहित सहयोगी टीम का विशेष योगदान रहा। आयोजकों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प लिया।
“रक्तदान करें, जीवन बचाएं — आपका एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।”

रक्तदान एवं मेडिकल कैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न, 84 रक्तदाताओं ने किया रक्तदान, 35 लोगो ने करवाया मेडिकल चेकअप, 25 लोगो ने BMD ( हड्डियों की जांच) करवाई समाना बाहू, करनाल, 16 अगस्त 2026 समाना बाहू में आयोजित रक्तदान एवं मेडिकल कैंप सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। मिथुन सामना ने बताया इस रक्तदान शिविर में शिविर में 84 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानवता की सेवा में अपना योगदान दिया, जबकि 35 लोगों ने मेडिकल कैंप में स्वास्थ्य जांच करवाकर निःशुल्क दवाइयाँ प्राप्त कीं। 25 लोगो ने बीएमडी (हड्डियों की जांच) का टेस्ट करवाया इस रक्तदान शिविर में समाना बाहु गांव के हर्ष, हरविंदर, राहुल, दलबीर, सुमित आदि सहित समस्त ग्रामवासी का विशेष सहयोग रहा। सुमित खत्री ने बताया यह रक्तदान शिविर थैलासीमिया ग्रस्त बच्चों दुर्घटना ग्रस्त लोगों वह गर्भवती महिलाओं के इस्तेमाल में लाया जाएगा रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को प्रशंसा पत्र दिए गए। मित्र जनसेवा एव सेवा समिति कुरुक्षेत्र के सदस्यों ने इस शिविर में रक्तदान कर अच्छी भूमिका अदा करी। इस अवसर पर सुमित खत्री, दलबीर, हर्ष, हरदीप, रिंकू पधाना, अमित पाल , परवीन पाल, राज कुमार, सुशील,रोहित,हरविंदर सहित 99 रक्तदाताओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया व 84 रक्तदत्ताओ ने रक्तदान किया। शिविर के दौरान सुमित खत्री ने 58वीं बार रक्तदान करते हुए लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी रक्तदाताओं, मेडिकल टीम, सहयोगियों एवं शिविर में पहुंचकर इस नेक कार्य को सफल बनाने वाले सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मिथुन समाना बाहू एवं समस्त ग्रामवासियों सहित सहयोगी टीम का विशेष योगदान रहा। आयोजकों ने भविष्य में भी इसी प्रकार के सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सेवा कार्य जारी रखने का संकल्प लिया। “रक्तदान करें, जीवन बचाएं — आपका एक छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।”

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026

हनुमानगढ़ के कालीबंगा व पीलीबंगा क्षेत्र में सरस्वती नदी पर चल रहे शोध कार्य का अवलोकन

हनुमानगढ़, 17 अगस्त 2026

सरस्वती-सिंधु सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल कालीबंगा का आज दौरा कर वहां सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र पर चल रहे शोध कार्यों का अवलोकन किया।

कालीबंगा विश्व का पहला ऐसा पुरातात्विक स्थल है, जहाँ से जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं। यह विश्व में इस प्रकार का प्राचीनतम उदाहरण है। यहाँ से प्राप्त साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रारंभिक हड़प्पा काल के लोग खेती में आत्मनिर्भर थे और उनकी कृषि प्रणाली काफी उन्नत थी।

खुदाई में यहाँ हड़प्पा काल की विकसित आवासीय प्रणाली के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। कालीबंगा और पीलीबंगा की खुदाई से सरस्वती नदी के किनारे बसे इस नगर के कई महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें -

पक्की मिट्टी से निर्मित पशु-पक्षियों की आकृतियां, खिलौना गाड़ियां, डमरू
शिवलिंग, मृत भांडों के टुकड़े
मिट्टी से निर्मित हल और बैलों की आकृतियां, बैलगाड़ी के प्रमाण

इन प्रमाणों से पता चलता है कि यहाँ के लोग गेहूं, जौ, चना, मटर और चावल जैसी फसलों की खेती करते थे। मिट्टी के हल और बैलों की आकृतियों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहाँ की खेती उस समय के हिसाब से बहुत एडवांस थी।

कालीबंगा स्थल सरस्वती सभ्यता की आर्थिक समृद्धि और सुनियोजित नगर व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है। सरस्वती नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र पर और गहन शोध की आवश्यकता है ताकि हमारी प्राचीन विरासत को दुनिया के सामने और बेहतर तरीके से रखा जा सके।

हनुमानगढ़ के कालीबंगा व पीलीबंगा क्षेत्र में सरस्वती नदी पर चल रहे शोध कार्य का अवलोकन हनुमानगढ़, 17 अगस्त 2026 सरस्वती-सिंधु सभ्यता के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल कालीबंगा का आज दौरा कर वहां सरस्वती नदी के प्राचीन प्रवाह क्षेत्र पर चल रहे शोध कार्यों का अवलोकन किया। कालीबंगा विश्व का पहला ऐसा पुरातात्विक स्थल है, जहाँ से जुते हुए खेत के अवशेष मिले हैं। यह विश्व में इस प्रकार का प्राचीनतम उदाहरण है। यहाँ से प्राप्त साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रारंभिक हड़प्पा काल के लोग खेती में आत्मनिर्भर थे और उनकी कृषि प्रणाली काफी उन्नत थी। खुदाई में यहाँ हड़प्पा काल की विकसित आवासीय प्रणाली के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं। कालीबंगा और पीलीबंगा की खुदाई से सरस्वती नदी के किनारे बसे इस नगर के कई महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनमें - पक्की मिट्टी से निर्मित पशु-पक्षियों की आकृतियां, खिलौना गाड़ियां, डमरू शिवलिंग, मृत भांडों के टुकड़े मिट्टी से निर्मित हल और बैलों की आकृतियां, बैलगाड़ी के प्रमाण इन प्रमाणों से पता चलता है कि यहाँ के लोग गेहूं, जौ, चना, मटर और चावल जैसी फसलों की खेती करते थे। मिट्टी के हल और बैलों की आकृतियों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहाँ की खेती उस समय के हिसाब से बहुत एडवांस थी। कालीबंगा स्थल सरस्वती सभ्यता की आर्थिक समृद्धि और सुनियोजित नगर व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है। सरस्वती नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र पर और गहन शोध की आवश्यकता है ताकि हमारी प्राचीन विरासत को दुनिया के सामने और बेहतर तरीके से रखा जा सके।

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026

पौधारोपण से हुई शुरुआत, कक्षा से लेकर कैंपस तक छात्रों के बीच रहे दिग्विजय चौटाला
डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा 
कुरुक्षेत्र, 17 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अपने पहले दिन कक्षा लगाने पहुंचे दिग्विजय सिंह चौटाला का विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। विश्वविद्यालय पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के चेयरमैन डॉ. राजेश कुमार से मुलाकात की और उन्हें बुके भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद दिग्विजय सिंह चौटाला ने कक्षा में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ाई की और अपने विश्वविद्यालयी शैक्षणिक सफर की शुरुआत की।कक्षा के बाद दिग्विजय सिंह चौटाला ने विश्वविद्यालय के कैफे हाउस में विद्यार्थियों के साथ छात्र संवाद किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं, कैंपस से जुड़े विषयों तथा विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने छात्रों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की आवाज महत्वपूर्ण है।दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि विश्वविद्यालय में उनका पहला दिन उनके लिए विशेष और यादगार है। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि कैंपस की गतिविधियों, विद्यार्थियों की समस्याओं और उनके विचारों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि वे हमेशा उनके बीच रहेंगे और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे।इसके बाद दिग्विजय सिंह चौटाला विश्वविद्यालय की मैस में पहुंचे और विद्यार्थियों के साथ बैठकर लंच किया। उन्होंने छात्रों के साथ सहज माहौल में बातचीत करते हुए उनके अनुभव और रोजमर्रा की समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली। मैस में अपने बीच दिग्विजय चौटाला को देखकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, अच्छी सुविधाएं और अपनी बात रखने के लिए उचित मंच मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को मजबूती से उठाना हर छात्र नेता की जिम्मेदारी है।दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि “मेरा प्रयास रहेगा कि मैं केवल कक्षा तक सीमित न रहूं, बल्कि विश्वविद्यालय के हर छात्र के साथ संवाद करूं, उनकी समस्याओं को समझूं और छात्र हितों के लिए हमेशा उनके साथ खड़ा रहूं।”उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उनका जुड़ाव उनके लिए गौरव की बात है और आने वाले दिनों में भी वे विद्यार्थियों के साथ लगातार संवाद करते रहेंगे। उन्होंने छात्रों से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।इस मौके पर डॉ. जसविंदर खैहरा, राजू ढुल पाई, विशाल मुकीमपुरा, राजेश पायलट, नवीन सिहाग, मनवीर बुरा, विक्रांत सिंह, शिवांश शर्मा, रितु रानी, अमरजीत गोरिया सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।पौधारोपण से शुरू हुआ दिन, विभागाध्यक्ष से मुलाकात, कक्षा, छात्र संवाद और मैस में विद्यार्थियों के साथ लंच तक छात्रों के बीच बीता। दिग्विजय सिंह चौटाला के पहले दिन की यह सक्रियता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ सीधे जुड़ने और उनकी बात सुनने की उनकी सोच को दर्शाती है।

पौधारोपण से हुई शुरुआत, कक्षा से लेकर कैंपस तक छात्रों के बीच रहे दिग्विजय चौटाला डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा कुरुक्षेत्र, 17 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अपने पहले दिन कक्षा लगाने पहुंचे दिग्विजय सिंह चौटाला का विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। विश्वविद्यालय पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के चेयरमैन डॉ. राजेश कुमार से मुलाकात की और उन्हें बुके भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद दिग्विजय सिंह चौटाला ने कक्षा में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ाई की और अपने विश्वविद्यालयी शैक्षणिक सफर की शुरुआत की।कक्षा के बाद दिग्विजय सिंह चौटाला ने विश्वविद्यालय के कैफे हाउस में विद्यार्थियों के साथ छात्र संवाद किया। इस दौरान उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं, कैंपस से जुड़े विषयों तथा विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर विस्तार से बातचीत की। उन्होंने छात्रों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की आवाज महत्वपूर्ण है।दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि विश्वविद्यालय में उनका पहला दिन उनके लिए विशेष और यादगार है। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि कैंपस की गतिविधियों, विद्यार्थियों की समस्याओं और उनके विचारों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि वे हमेशा उनके बीच रहेंगे और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे।इसके बाद दिग्विजय सिंह चौटाला विश्वविद्यालय की मैस में पहुंचे और विद्यार्थियों के साथ बैठकर लंच किया। उन्होंने छात्रों के साथ सहज माहौल में बातचीत करते हुए उनके अनुभव और रोजमर्रा की समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली। मैस में अपने बीच दिग्विजय चौटाला को देखकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, अच्छी सुविधाएं और अपनी बात रखने के लिए उचित मंच मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को मजबूती से उठाना हर छात्र नेता की जिम्मेदारी है।दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि “मेरा प्रयास रहेगा कि मैं केवल कक्षा तक सीमित न रहूं, बल्कि विश्वविद्यालय के हर छात्र के साथ संवाद करूं, उनकी समस्याओं को समझूं और छात्र हितों के लिए हमेशा उनके साथ खड़ा रहूं।”उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उनका जुड़ाव उनके लिए गौरव की बात है और आने वाले दिनों में भी वे विद्यार्थियों के साथ लगातार संवाद करते रहेंगे। उन्होंने छात्रों से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और रचनात्मक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।इस मौके पर डॉ. जसविंदर खैहरा, राजू ढुल पाई, विशाल मुकीमपुरा, राजेश पायलट, नवीन सिहाग, मनवीर बुरा, विक्रांत सिंह, शिवांश शर्मा, रितु रानी, अमरजीत गोरिया सहित अन्य साथी उपस्थित रहे।पौधारोपण से शुरू हुआ दिन, विभागाध्यक्ष से मुलाकात, कक्षा, छात्र संवाद और मैस में विद्यार्थियों के साथ लंच तक छात्रों के बीच बीता। दिग्विजय सिंह चौटाला के पहले दिन की यह सक्रियता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ सीधे जुड़ने और उनकी बात सुनने की उनकी सोच को दर्शाती है।

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026

*प्राचीन मुल्तान ज्योत उत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग*
-सन्निहित सरोवर तक बैंड-बाजों और झांकियों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु*
*भाजयुमो जिलाध्यक्ष साहिल सुधा रहे मुख्यातिथि*
*शहर के गणमान्य लोगों ने की शिरकत मिलकर मुल्तान ज्योत को किया प्रवाहित*
*51 कंजकों का किया पूजन*
डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा 
कुरुक्षेत्र, 17 अगस्त। प्राचीन मुल्तान सभा की ओर से सन्निहित सरोवर के तट पर रविवार को ‘प्राचीन मुल्तान ज्योत (सेसा) उत्सव’ श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बैंड-बाजों, आकर्षक झांकियों और धार्मिक गीतों के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्राचीन मुल्तान सभा के प्रधान प्रदीप झांब ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष पवित्र सावन मास में प्राचीन परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 16 अगस्त को आयोजित उत्सव की शुरुआत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे अंबेडकर चौक से बैंड-बाजों और झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा सन्निहित सरोवर के लिए रवाना हुई। रास्तेभर श्रद्धालु धार्मिक गीतों पर नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।
सन्निहित सरोवर पहुंचने पर शाम करीब 4 बजे श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। करीब दो घंटे तक चले कार्यक्रम में श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए प्रभु भक्ति में लीन नजर आए। देर शाम सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर धार्मिक विधि-विधान के साथ मुल्तान ज्योत को सन्निहित सरोवर में प्रवाहित किया। इसके बाद 51 कंजकों का पूजन किया गया और श्रद्धालुओं को हलवा-छोले का प्रसाद वितरित किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष साहिल सुधा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और श्रद्धालुओं को मुल्तान ज्योत उत्सव की शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक खंडूजा और पावन नरूला उपस्थित रहे।
प्रधान प्रदीप झांब ने कहा कि मुल्तान ज्योत उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी है। सभा द्वारा वर्षों से इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम में महासचिव धर्मेंद्र सचदेवा, डॉ. एसी नागपाल, डॉ. सुरेंद्र मेहता, डॉ. अंशुल ग्रोवर, डॉ. देश ललित, डॉ. विवेक ललित, संदीप मदान, राजन चावला, फतेहचंद गांधी, मुल्खराज अरोड़ा, अमीर चंद, कृष्ण लाल पुंडरी, मास्टर ओमप्रकाश, पार्षद सुधीर चुघ,

टोनी मदान, मोहन लाल अरोड़ा, पंकज खन्ना, महेंद्र मेहता, यशपाल नारंग, सुरेश धवन, प्रेम मदान, एडवोकेट संजीव धवन, राजू झांब, देवेंद्र चावला, जितेंद्र अरोड़ा, महेश तनेजा, डॉ. श्यामलाल आहूजा, कृष्ण धवन, खेम चंद वाधवा, विनीत बजाज, कृष्ण लाल मेहता, सुरेंद्र काठपाल, पंडित अंकित शर्मा, नंदलाल धवन, ओम प्रकाश अरोड़ा, सुभाष सुखीजा, कृष्ण सचदेवा, रविंद्र सेठी, जगदीश सचदेवा, सुनील राजपाल, प्रेम ग्रोवर, वेद प्रकाश धवन, विनोद सहगल, कृष्ण धमीजा, अशोक सचदेवा, ओपी आहूजा, विकास चुघ, सुरेश मल्होत्रा, कुणाल झांब, पंकज अरोड़ा, नरेश सोनी, गुलशन ग्रोवर, जोगिंदर झांब, राजीव चुघ, बिट्टू नय्यर, श्याम सुंदर जुनेजा, ममता आहूजा, पूजा सरदाना, कमलेश, संतोष और इंदु बाला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
23 अगस्त को हरिद्वार रवाना होगी मुल्तान ज्योत
प्रदीप झांब ने बताया कि रविवार, 23 अगस्त को मुल्तान ज्योत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला से हरिद्वार के लिए रवाना होगी। दो बसों में सवार होकर श्रद्धालु हरिद्वार जाएंगे। पूर्व मंत्री सुभाष सुधा बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों से सभा द्वारा नि:शुल्क बसों के माध्यम से मुल्तान समाज के श्रद्धालुओं को हरिद्वार ले जाया जा रहा है।
हरिद्वार पहुंचने के बाद शाम 5 बजे भीमगोड़ा स्थित जयराम आश्रम विद्यापीठ से शोभायात्रा निकाली जाएगी और सभी की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की जाएगी।
अविभाजित भारत के मुल्तान से जुड़ा है ज्योत का इतिहास
प्रदीप झांब के अनुसार सावन के महीने में आयोजित होने वाली मुल्तान ज्योत का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा भगवान शिव के प्रति आस्था से जुड़ी है। इसकी शुरुआत अविभाजित भारत के मुल्तान जिले, जो अब पाकिस्तान में है, के रहने वाले लाला रूप चंद्र मुल्तानी ने अपने साथियों के साथ की थी।
बताया जाता है कि उस समय मुल्तान क्षेत्र में नदियों की बाढ़ और तूफानों से होने वाले जान-माल के नुकसान से मुक्ति की कामना को लेकर लाला रूप चंद्र मुल्तानी अपने साथियों के साथ पैदल हरिद्वार पहुंचे थे और मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की थी। तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली आ रही है और आज भी मुल्तान समाज इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है।

*प्राचीन मुल्तान ज्योत उत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग* -सन्निहित सरोवर तक बैंड-बाजों और झांकियों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा, भजन-कीर्तन में झूमे श्रद्धालु* *भाजयुमो जिलाध्यक्ष साहिल सुधा रहे मुख्यातिथि* *शहर के गणमान्य लोगों ने की शिरकत मिलकर मुल्तान ज्योत को किया प्रवाहित* *51 कंजकों का किया पूजन* डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा कुरुक्षेत्र, 17 अगस्त। प्राचीन मुल्तान सभा की ओर से सन्निहित सरोवर के तट पर रविवार को ‘प्राचीन मुल्तान ज्योत (सेसा) उत्सव’ श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया गया। धार्मिक आस्था और वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़े इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। बैंड-बाजों, आकर्षक झांकियों और धार्मिक गीतों के बीच निकली शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्राचीन मुल्तान सभा के प्रधान प्रदीप झांब ने बताया कि यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष पवित्र सावन मास में प्राचीन परंपरा के अनुसार आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 16 अगस्त को आयोजित उत्सव की शुरुआत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद दोपहर करीब 3 बजे अंबेडकर चौक से बैंड-बाजों और झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा सन्निहित सरोवर के लिए रवाना हुई। रास्तेभर श्रद्धालु धार्मिक गीतों पर नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। सन्निहित सरोवर पहुंचने पर शाम करीब 4 बजे श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। करीब दो घंटे तक चले कार्यक्रम में श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए प्रभु भक्ति में लीन नजर आए। देर शाम सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर धार्मिक विधि-विधान के साथ मुल्तान ज्योत को सन्निहित सरोवर में प्रवाहित किया। इसके बाद 51 कंजकों का पूजन किया गया और श्रद्धालुओं को हलवा-छोले का प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष साहिल सुधा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और श्रद्धालुओं को मुल्तान ज्योत उत्सव की शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक खंडूजा और पावन नरूला उपस्थित रहे। प्रधान प्रदीप झांब ने कहा कि मुल्तान ज्योत उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी है। सभा द्वारा वर्षों से इस परंपरा को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। कार्यक्रम में महासचिव धर्मेंद्र सचदेवा, डॉ. एसी नागपाल, डॉ. सुरेंद्र मेहता, डॉ. अंशुल ग्रोवर, डॉ. देश ललित, डॉ. विवेक ललित, संदीप मदान, राजन चावला, फतेहचंद गांधी, मुल्खराज अरोड़ा, अमीर चंद, कृष्ण लाल पुंडरी, मास्टर ओमप्रकाश, पार्षद सुधीर चुघ, टोनी मदान, मोहन लाल अरोड़ा, पंकज खन्ना, महेंद्र मेहता, यशपाल नारंग, सुरेश धवन, प्रेम मदान, एडवोकेट संजीव धवन, राजू झांब, देवेंद्र चावला, जितेंद्र अरोड़ा, महेश तनेजा, डॉ. श्यामलाल आहूजा, कृष्ण धवन, खेम चंद वाधवा, विनीत बजाज, कृष्ण लाल मेहता, सुरेंद्र काठपाल, पंडित अंकित शर्मा, नंदलाल धवन, ओम प्रकाश अरोड़ा, सुभाष सुखीजा, कृष्ण सचदेवा, रविंद्र सेठी, जगदीश सचदेवा, सुनील राजपाल, प्रेम ग्रोवर, वेद प्रकाश धवन, विनोद सहगल, कृष्ण धमीजा, अशोक सचदेवा, ओपी आहूजा, विकास चुघ, सुरेश मल्होत्रा, कुणाल झांब, पंकज अरोड़ा, नरेश सोनी, गुलशन ग्रोवर, जोगिंदर झांब, राजीव चुघ, बिट्टू नय्यर, श्याम सुंदर जुनेजा, ममता आहूजा, पूजा सरदाना, कमलेश, संतोष और इंदु बाला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। 23 अगस्त को हरिद्वार रवाना होगी मुल्तान ज्योत प्रदीप झांब ने बताया कि रविवार, 23 अगस्त को मुल्तान ज्योत चक्रवर्ती मोहल्ला स्थित धर्मशाला से हरिद्वार के लिए रवाना होगी। दो बसों में सवार होकर श्रद्धालु हरिद्वार जाएंगे। पूर्व मंत्री सुभाष सुधा बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 12 वर्षों से सभा द्वारा नि:शुल्क बसों के माध्यम से मुल्तान समाज के श्रद्धालुओं को हरिद्वार ले जाया जा रहा है। हरिद्वार पहुंचने के बाद शाम 5 बजे भीमगोड़ा स्थित जयराम आश्रम विद्यापीठ से शोभायात्रा निकाली जाएगी और सभी की सुख-समृद्धि की कामना के साथ मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की जाएगी। अविभाजित भारत के मुल्तान से जुड़ा है ज्योत का इतिहास प्रदीप झांब के अनुसार सावन के महीने में आयोजित होने वाली मुल्तान ज्योत का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा भगवान शिव के प्रति आस्था से जुड़ी है। इसकी शुरुआत अविभाजित भारत के मुल्तान जिले, जो अब पाकिस्तान में है, के रहने वाले लाला रूप चंद्र मुल्तानी ने अपने साथियों के साथ की थी। बताया जाता है कि उस समय मुल्तान क्षेत्र में नदियों की बाढ़ और तूफानों से होने वाले जान-माल के नुकसान से मुक्ति की कामना को लेकर लाला रूप चंद्र मुल्तानी अपने साथियों के साथ पैदल हरिद्वार पहुंचे थे और मां गंगा में ज्योत प्रवाहित की थी। तभी से यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती चली आ रही है और आज भी मुल्तान समाज इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहा है।

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026

#चिकित्सा सेवा के साथ साथ मानवता भलाई कार्यों व #जरूरत लोगो की मदद करने में अग्रणी रहने वाली बिलासपुर के #श्री #कृष्णा #हॉस्पिटल की डॉक्टर #सृष्टि सैनी को स्थानीय प्रशासन नें स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष में आयोजित #समारोह में प्रशंशित पत्र देकर सम्मानित किया ल #डॉ सैनी चिकित्सा में बेहतर सेवाओं के साथ #साथ लम्बे समय से जरूरतमंदो की भी #मदद कर रही है

#चिकित्सा सेवा के साथ साथ मानवता भलाई कार्यों व #जरूरत लोगो की मदद करने में अग्रणी रहने वाली बिलासपुर के #श्री #कृष्णा #हॉस्पिटल की डॉक्टर #सृष्टि सैनी को स्थानीय प्रशासन नें स्वतन्त्रता दिवस के उपलक्ष में आयोजित #समारोह में प्रशंशित पत्र देकर सम्मानित किया ल #डॉ सैनी चिकित्सा में बेहतर सेवाओं के साथ #साथ लम्बे समय से जरूरतमंदो की भी #मदद कर रही है

Thanesar, Kurukshetra | Aug 17, 2026