बिहार में बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। कई इलाकों में लोग खाने-पीने और जरूरी सामान के लिए परेशान हैं।
ऐसे वक्त में लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उनके जनप्रतिनिधि और सरकार की राहत व्यवस्था जमीन पर कितनी सक्रिय है।
मुसीबत में फंसे लोगों को सिर्फ मदद का भरोसा नहीं, बल्कि समय पर राहत और जिम्मेदारों की मौजूदगी भी चाहिए। अब सवाल यही है—बाढ़ से जूझ रही जनता की आवाज़ कब तक सुनी जाएगी?