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शहडोल@ शहर से लेकर गांव तक हुई झमा-झम बारिश,

Sohagpur, Shahdol | May 16, 2021

MORE NEWS

सफलता की कहानी 
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कौआसरई के 30 परिवारों ने अपनाई प्राकृतिक खेती, कम लागत में बढ़ रही आमदनी
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खेती की लागत कम होने और जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से महिलाएं भी उत्साहित
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वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद, जीवामृत स्वयं तैयार करती हैं महिलाएं 
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जिले के कौआसरई ग्राम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल अब किसानों के लिए कम लागत में बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। ग्राम के 30 परिवारों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है, जिसमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी है। रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम होने तथा जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से किसान परिवारों को खेती में नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। 

गांव की सीआरपी की महिलाएं आरती सिंह एवं रानू यादव ने बताया कि पूर्व में जब रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते थे तो एक एकड़ में 03 बोरी यूरिया एवं 02 बोरी डीएपी इस तरह 04 हजार रूपए लग जाते थे। अब घर मे ही वर्मी कम्पोष्ट एजोला, हरी खाद तथा जीवामृत आदि तैयार कर लेते हैं। जिससे एक एकड़ में 1500 रूपए की लागत आती है। प्राकृतिक खेती से प्रथम वर्ष उत्पादन में कमी आई है। जिसकी प्रतिपूर्ति जैविक अनाज के मूल्य संवर्धन से हो जाती है। उन्होंने बताया कि चना, कुटकी, अलसी, मटर, गेहूं, धान एवं सब्जी का उत्पादन करते हैं। बाजारों में ये अधिक मूल्य पर बिक जाते हैं। 

प्राकृतिक खेती से आस-पास के ग्रामों की 300 किसान महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्राकृतिक खेती करने से भूमि बंजर होने से बच जाती है, बीमारियों में कमी आती है। सिंचाई के लिए पनी कम लगता है तथा उपज का अधिक मूल्य मिलता है। 
किसान खेती के लिए आवश्यक जैविक संसाधनों को स्थानीय स्तर पर स्वयं तैयार कर रहे हैं। किसान वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद तैयार कर उसका उपयोग खेतों में कर रहे हैं। इससे बाहरी आदानों पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल रही है। 

साथ ही जैविक संसाधनों के उपयोग से खेतों की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में भी किसान आगे बढ़ रहे हैं।
कृषि विभाग और प्रधान एनजीओ दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन
प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को कृषि विभाग एवं प्रधान एनजीओ द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों, जैविक खाद तैयार करने तथा खेतों में उसके उपयोग की तकनीक की जानकारी दी जा रही है। विभागीय अमले एवं संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है।

कौआसरई ग्राम में विधायक श्री शरद कोल, कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिलाओं एवं किसानों से रूबरू चर्चा कर तकनीकी जानकारी विक्रय, बीज की उपलब्धता आदि के संबंध में चर्चा की। कलेक्टर ने जैविक उत्पाद को सीधे बाजार में बेचने तथा ब्रांडिंग कर उत्पाद की पहचान एवं मूल्य संवर्धन के लिए एफपीओ बनाकर काम करने की समझाइश दी। 

उप संचालक कृषि श्री केएस यादव ने बताया कि शासन द्वारा इन किसानों को 04 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से अनुदान भी दिया गया है।  साथ ही बीआरसी को आवश्यक संयंत्रों की खरीदी हेतु जल्द ही 01 लाख रूपए का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

#शहडोल #shahdol

सफलता की कहानी =-== कौआसरई के 30 परिवारों ने अपनाई प्राकृतिक खेती, कम लागत में बढ़ रही आमदनी ==== खेती की लागत कम होने और जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से महिलाएं भी उत्साहित === वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद, जीवामृत स्वयं तैयार करती हैं महिलाएं === जिले के कौआसरई ग्राम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की पहल अब किसानों के लिए कम लागत में बेहतर उत्पादन और आय बढ़ाने का माध्यम बन रही है। ग्राम के 30 परिवारों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है, जिसमें महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी है। रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम होने तथा जैविक उत्पादों के मूल्य संवर्धन से किसान परिवारों को खेती में नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। गांव की सीआरपी की महिलाएं आरती सिंह एवं रानू यादव ने बताया कि पूर्व में जब रासायनिक उर्वरक का उपयोग करते थे तो एक एकड़ में 03 बोरी यूरिया एवं 02 बोरी डीएपी इस तरह 04 हजार रूपए लग जाते थे। अब घर मे ही वर्मी कम्पोष्ट एजोला, हरी खाद तथा जीवामृत आदि तैयार कर लेते हैं। जिससे एक एकड़ में 1500 रूपए की लागत आती है। प्राकृतिक खेती से प्रथम वर्ष उत्पादन में कमी आई है। जिसकी प्रतिपूर्ति जैविक अनाज के मूल्य संवर्धन से हो जाती है। उन्होंने बताया कि चना, कुटकी, अलसी, मटर, गेहूं, धान एवं सब्जी का उत्पादन करते हैं। बाजारों में ये अधिक मूल्य पर बिक जाते हैं। प्राकृतिक खेती से आस-पास के ग्रामों की 300 किसान महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्राकृतिक खेती करने से भूमि बंजर होने से बच जाती है, बीमारियों में कमी आती है। सिंचाई के लिए पनी कम लगता है तथा उपज का अधिक मूल्य मिलता है। किसान खेती के लिए आवश्यक जैविक संसाधनों को स्थानीय स्तर पर स्वयं तैयार कर रहे हैं। किसान वर्मी कम्पोस्ट, एजोला एवं हरी खाद तैयार कर उसका उपयोग खेतों में कर रहे हैं। इससे बाहरी आदानों पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल रही है। साथ ही जैविक संसाधनों के उपयोग से खेतों की उर्वरता बनाए रखने की दिशा में भी किसान आगे बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग और प्रधान एनजीओ दे रहे तकनीकी मार्गदर्शन प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को कृषि विभाग एवं प्रधान एनजीओ द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न विधियों, जैविक खाद तैयार करने तथा खेतों में उसके उपयोग की तकनीक की जानकारी दी जा रही है। विभागीय अमले एवं संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जा रहा है। कौआसरई ग्राम में विधायक श्री शरद कोल, कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल, पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत श्री शिवम प्रजापति ने प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिलाओं एवं किसानों से रूबरू चर्चा कर तकनीकी जानकारी विक्रय, बीज की उपलब्धता आदि के संबंध में चर्चा की। कलेक्टर ने जैविक उत्पाद को सीधे बाजार में बेचने तथा ब्रांडिंग कर उत्पाद की पहचान एवं मूल्य संवर्धन के लिए एफपीओ बनाकर काम करने की समझाइश दी। उप संचालक कृषि श्री केएस यादव ने बताया कि शासन द्वारा इन किसानों को 04 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से अनुदान भी दिया गया है। साथ ही बीआरसी को आवश्यक संयंत्रों की खरीदी हेतु जल्द ही 01 लाख रूपए का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। #शहडोल #shahdol

Shahdol, Madhya Pradesh | Aug 17, 2026

खुशियों की दास्तां 
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शहडोल के दो वनकर्मियों को राष्ट्रीय स्तर पर गज गौरव अवॉर्ड
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हाथी-मानव द्वंद्व प्रबंधन, जनसुरक्षा एवं हाथी संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला सम्मान
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शहडोल जिले के लिए गौरव का विषय है कि हाथी संरक्षण एवं मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के दो वनकर्मियों को गज गौरव अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में आयोजित सम्मान समारोह में बुढार रेंज के तत्कालीन वनरक्षक सम्हारुद्दीन बैगा एवं वनरक्षक राकेश बैगा को आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण द्वारा यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष विश्व हाथी दिवस के अवसर पर गज गौरव अवॉर्ड प्रदान किया जाता है। यह सम्मान हाथियों के संरक्षण, मानव-हाथी द्वंद्व के प्रभावी प्रबंधन तथा हाथियों की सुरक्षा के लिए मैदानी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है।

दिन-रात निगरानी और ग्रामीणों के साथ समन्वय

वर्ष 2025-26 के दौरान बुढार रेंज क्षेत्र में हाथियों के झुंडों की लगातार आवाजाही एवं लंबे समय तक मौजूदगी के दौरान दोनों वनकर्मियों ने जनसुरक्षा और हाथियों के सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य किया। उन्होंने दिन-रात निगरानी के साथ रात्रि गश्त, हाथियों की गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित किया।

हाथियों की गतिविधियों के संबंध में ग्रामीणों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए गए। हाथी प्रभावित एवं संवेदनशील परिवारों को आवश्यकतानुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सहयोग किया गया। साथ ही प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग के साथ समन्वय किया गया।

मानव-हाथी द्वंद्व कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका

दोनों वनकर्मियों की सक्रियता एवं सतत मैदानी उपस्थिति से हाथियों के आवागमन के दौरान संभावित मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिली। उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही हाथियों को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गईं।

वनकर्मियों द्वारा स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर हाथियों के व्यवहार, उनकी गतिविधियों एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक सावधानियों के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। इससे ग्रामीणों और हाथियों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में भी मदद मिली।

शहडोल के लिए गौरव का क्षण

गज गौरव अवॉर्ड-2026 में मध्यप्रदेश से शहडोल जिले के इन दो वनकर्मियों का सम्मान जिले और प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा किए जा रहे समर्पित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान उनके कार्यों के प्रति प्रोत्साहन और मनोबल बढ़ाने वाली है।

वनरक्षक सम्हारुद्दीन बैगा वर्तमान में शहडोल नर्सरी डिपो में पदस्थ हैं, जबकि वनरक्षक राकेश बैगा बुढार रेंज में सेवाएं दे रहे हैं। सम्मान मिलने पर दोनों वनकर्मियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों के मार्गदर्शन, विभागीय टीम के सहयोग और मैदानी स्तर पर लगातार किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

हाथियों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास

शहडोल संभाग में पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की गतिविधियों में वृद्धि हुई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अलावा शहडोल के बाणसागर बैकवाटर क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न इलाकों में हाथियों के झुंडों की आवाजाही देखी जाती है। छत्तीसगढ़ की ओर से अनूपपुर होते हुए भी हाथियों का आवागमन बना रहता है।

ऐसे में वन विभाग द्वारा हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा, ग्रामीणों में जागरूकता तथा मानव-हाथी द्वंद्व को न्यूनतम करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। गज गौरव अवॉर्ड से सम्मानित दोनों वनकर्मियों का कार्य इन प्रयासों का प्रेरणादायी उदाहरण है।

#shahdol

खुशियों की दास्तां === शहडोल के दो वनकर्मियों को राष्ट्रीय स्तर पर गज गौरव अवॉर्ड === हाथी-मानव द्वंद्व प्रबंधन, जनसुरक्षा एवं हाथी संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला सम्मान ==== शहडोल जिले के लिए गौरव का विषय है कि हाथी संरक्षण एवं मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिले के दो वनकर्मियों को गज गौरव अवॉर्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में आयोजित सम्मान समारोह में बुढार रेंज के तत्कालीन वनरक्षक सम्हारुद्दीन बैगा एवं वनरक्षक राकेश बैगा को आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री पवन कल्याण द्वारा यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष विश्व हाथी दिवस के अवसर पर गज गौरव अवॉर्ड प्रदान किया जाता है। यह सम्मान हाथियों के संरक्षण, मानव-हाथी द्वंद्व के प्रभावी प्रबंधन तथा हाथियों की सुरक्षा के लिए मैदानी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है। दिन-रात निगरानी और ग्रामीणों के साथ समन्वय वर्ष 2025-26 के दौरान बुढार रेंज क्षेत्र में हाथियों के झुंडों की लगातार आवाजाही एवं लंबे समय तक मौजूदगी के दौरान दोनों वनकर्मियों ने जनसुरक्षा और हाथियों के सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य किया। उन्होंने दिन-रात निगरानी के साथ रात्रि गश्त, हाथियों की गतिविधियों की सतत मॉनिटरिंग तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय स्थापित किया। हाथियों की गतिविधियों के संबंध में ग्रामीणों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए गए। हाथी प्रभावित एवं संवेदनशील परिवारों को आवश्यकतानुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सहयोग किया गया। साथ ही प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराने के लिए राजस्व विभाग के साथ समन्वय किया गया। मानव-हाथी द्वंद्व कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका दोनों वनकर्मियों की सक्रियता एवं सतत मैदानी उपस्थिति से हाथियों के आवागमन के दौरान संभावित मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिली। उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही हाथियों को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की गईं। वनकर्मियों द्वारा स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर हाथियों के व्यवहार, उनकी गतिविधियों एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक सावधानियों के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। इससे ग्रामीणों और हाथियों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में भी मदद मिली। शहडोल के लिए गौरव का क्षण गज गौरव अवॉर्ड-2026 में मध्यप्रदेश से शहडोल जिले के इन दो वनकर्मियों का सम्मान जिले और प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। हाथियों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा किए जा रहे समर्पित प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान उनके कार्यों के प्रति प्रोत्साहन और मनोबल बढ़ाने वाली है। वनरक्षक सम्हारुद्दीन बैगा वर्तमान में शहडोल नर्सरी डिपो में पदस्थ हैं, जबकि वनरक्षक राकेश बैगा बुढार रेंज में सेवाएं दे रहे हैं। सम्मान मिलने पर दोनों वनकर्मियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अधिकारियों के मार्गदर्शन, विभागीय टीम के सहयोग और मैदानी स्तर पर लगातार किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। हाथियों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास शहडोल संभाग में पिछले कुछ वर्षों में हाथियों की गतिविधियों में वृद्धि हुई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अलावा शहडोल के बाणसागर बैकवाटर क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न इलाकों में हाथियों के झुंडों की आवाजाही देखी जाती है। छत्तीसगढ़ की ओर से अनूपपुर होते हुए भी हाथियों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में वन विभाग द्वारा हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा, ग्रामीणों में जागरूकता तथा मानव-हाथी द्वंद्व को न्यूनतम करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। गज गौरव अवॉर्ड से सम्मानित दोनों वनकर्मियों का कार्य इन प्रयासों का प्रेरणादायी उदाहरण है। #shahdol

Shahdol, Madhya Pradesh | Aug 16, 2026

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Sohagpur, Shahdol | Aug 16, 2026

शहडोल@ शहर से लेकर गांव तक हुई झमा-झम बारिश, - Sohagpur News