नन्हे कदम, बड़े सपने: कभी द्रौपदी मुर्मू तो कभी डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम बनीं ताक्ष्वी रानी
रिपोर्ट: चंदेश कुमार पटेल
न्यूज कोऑर्डिनेटर हेड, झारखंड दृष्टि न्यूज
भारत की असली ताकत उसके बच्चों में बसती है। जब नन्हे बच्चे देश के महान व्यक्तित्वों को अपना आदर्श बनाकर उनके विचारों और जीवन मूल्यों को मंच पर जीवंत करते हैं, तब वह दृश्य केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रह जाता, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है झारखंड के गढ़वा जिले के रंका थाना प्रभारी रवि कुमार केशरी की लगभग तीन वर्षीय पुत्री ताक्ष्वी रानी की।
कम उम्र, मासूम चेहरा और छोटे-छोटे कदमों वाली ताक्ष्वी आज अपने अनोखे अंदाज के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बीते गणतंत्र दिवस और इस स्वतंत्रता दिवस पर उसने देश के दो महान राष्ट्रपतियों के रूप में प्रस्तुति देकर लोगों का दिल जीत लिया।
गणतंत्र दिवस पर बनीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर ताक्ष्वी रानी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का रूप धारण किया था। पारंपरिक परिधान में सजी नन्ही ताक्ष्वी जब तिरंगे झंडे के सामने पहुंची और सलामी दी, तो वहां उपस्थित लोग भावुक हो उठे। उसकी मासूम मुस्कान, आत्मविश्वास और गरिमामय प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और लोगों ने उसे प्यार से "नन्ही राष्ट्रपति" कहना शुरू कर दिया। उस दिन ताक्ष्वी ने नारी शक्ति, लोकतंत्र और नेतृत्व की भावना को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत कर दिया था।
स्वतंत्रता दिवस पर बनीं डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
इस बार 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ताक्ष्वी एक नए रूप में लोगों के सामने आईं। इस बार उन्होंने भारत रत्न, मिसाइल मैन, महान वैज्ञानिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का रूप धारण किया।
सफेद घुंघराले बालों की शैली, हल्के ग्रे रंग का बंद गले वाला कोट-पैंट और विनम्र मुद्रा ने लोगों को डॉ. कलाम की याद दिला दी। मंच पर खड़ी नन्ही ताक्ष्वी को देखकर ऐसा लग रहा था मानो बच्चों के प्रिय राष्ट्रपति डॉ. कलाम एक बार फिर नई पीढ़ी को बड़े सपने देखने का संदेश दे रहे हों।
जब नन्ही ताक्ष्वी ने डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के लुक में तिरंगे झंडे को सलामी दी, तो वहां उपस्थित लोगों की नजरें कुछ समय के लिए उसी दृश्य पर ठहर गईं। सफेद बालों और सादगीपूर्ण परिधान में सजी ताक्ष्वी की मासूम छवि ने सभी का मन मोह लिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो डॉ. कलाम के विचार, उनका संघर्ष और उनका राष्ट्रप्रेम उस नन्ही बच्ची के माध्यम से जीवंत हो उठा हो। उसकी मासूम मुस्कान, आत्मविश्वास से भरा अंदाज और तिरंगे के प्रति सम्मान का भाव हर किसी के दिल को छू गया। पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और कई लोगों ने उस अविस्मरणीय पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।
डॉ. कलाम का पूरा जीवन संघर्ष, शिक्षा, विज्ञान और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा। उन्होंने हमेशा कहा था कि बच्चों के सपने ही देश का भविष्य तय करते हैं। शायद यही कारण है कि ताक्ष्वी का यह रूप लोगों के दिलों को सीधे छू गया।
दो राष्ट्रीय पर्व, दो महान संदेश
ताक्ष्वी की दोनों प्रस्तुतियों को एक साथ देखने पर एक सुंदर संदेश उभरकर सामने आता है।
26 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के रूप में उन्होंने नेतृत्व, लोकतंत्र, महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक गरिमा का संदेश दिया।
15 अगस्त को डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के रूप में उन्होंने शिक्षा, विज्ञान, नवाचार, राष्ट्रनिर्माण और बड़े सपनों की प्रेरणा दी।
एक ओर देश की प्रथम नागरिक की गरिमा दिखाई दी, तो दूसरी ओर भारत के महान वैज्ञानिक और प्रेरणास्रोत राष्ट्रपति के विचारों की झलक देखने को मिली। एक प्रस्तुति ने लोकतंत्र की शक्ति को दर्शाया, तो दूसरी ने सपनों को साकार करने की प्रेरणा दी।
सोशल मीडिया पर सराहना
ताक्ष्वी की दोनों प्रस्तुतियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग उसकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की भावना की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि बच्चों को ऐसे महान व्यक्तित्वों से जोड़ना राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
रंका से निकलकर ताक्ष्वी की यह प्रेरणादायक कहानी अब दूर-दूर तक पहुंच रही है। लोग उसकी तस्वीरों को साझा करते हुए उसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक बता रहे हैं।
भविष्य के भारत की झलक
लगभग तीन वर्ष की ताक्ष्वी रानी ने यह साबित कर दिया है कि प्रेरणा की कोई उम्र नहीं होती। आज वह कम उम्र में ही देश के महान व्यक्तित्वों का रूप धारण कर रही है, लेकिन उसके माध्यम से समाज को एक बड़ा संदेश मिल रहा है कि बच्चों के मन में बचपन से ही अच्छे संस्कार, राष्ट्रप्रेम और महान आदर्शों के प्रति सम्मान विकसित किया जाना चाहिए।
कभी द्रौपदी मुर्मू बनकर उन्होंने नेतृत्व का संदेश दिया, तो कभी डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम बनकर सपनों की उड़ान का। यही कारण है कि ताक्ष्वी की कहानी केवल एक बच्ची की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जो अपने नन्हे बच्चों की आंखों में बड़े सपने देखता है।
Garhwa, Garhwa | Aug 17, 2026