नृत्य के साथ इतिहास को नई पहचान देने वाली डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम
डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम ने सिर्फ भरतनाट्यम को मंच पर प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि भारतीय नृत्य की प्राचीन परंपराओं पर गहराई से शोध भी किया। 4 फरवरी 1943 को मद्रास में जन्मीं पद्मा ने कम उम्र में भरतनाट्यम की शिक्षा शुरू की और गुरु वझुवूर रामैया पिल्लई व मायलापुर गौरी अम्मा से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में वर्णित ‘करणों’ और मंदिरों की प्राचीन नृत्य-मूर्तियों का अध्ययन किया। इसी शोध के आधार पर उन्होंने ‘भरतनृत्यम’ नामक नृत्य शैली को विकसित किया, जिसमें इतिहास, शास्त्र और मंचीय नृत्य का अनोखा संगम देखने को मिलता है।
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