गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग, पूर्व IAS सचिव विनोद रतूड़ी ने मुंडन कर शुरू की पदयात्रा
श्रीनगर। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर पूर्व आईएएस सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में देहरादून से गैरसैंण तक शुरू हुई पदयात्रा रविवार को श्रीनगर से डुंगरीपंथ की ओर रवाना हुई। 15 अगस्त से शुरू हुई यह पदयात्रा अपने नौवें दिन श्रीनगर पहुंची थी, जहां रात्रि विश्राम के बाद यात्रा आगे बढ़ाई गई।
गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के संयोजक विनोद रतूड़ी ने स्थायी राजधानी की मांग को लेकर विरोध स्वरूप अपना मुंडन भी कराया है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के ढाई दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उत्तराखंड की स्थायी राजधानी निर्धारित नहीं हो पाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
रतूड़ी ने कहा कि राज्य गठन के बाद देहरादून को अस्थायी राजधानी के तौर पर रखा गया था, जबकि बाद में भराड़ीसैंण (गैरसैंण) को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया। इसके बावजूद स्थायी राजधानी को लेकर स्थिति आज तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण मुद्दा लगातार लंबित है।
उन्होंने बताया कि स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर देहरादून के एकता विहार धरना स्थल पर 8 मार्च से 21 जून 2026 तक 106 दिनों का क्रमिक अनशन भी किया गया। इसी आंदोलन के दौरान उन्होंने विरोध स्वरूप मुंडन कराया था। अब उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 15 अगस्त से देहरादून विधानसभा से गैरसैंण तक पैदल यात्रा शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल राजधानी के सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ के समग्र विकास और उत्तराखंड की जनभावनाओं से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में पदयात्रा से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
श्रीनगर से डुंगरीपंथ की ओर रवाना हुई पदयात्रा में विनोद रतूड़ी के साथ उनकी टोली के सदस्य भी शामिल रहे। यात्रा के दौरान स्थायी राजधानी गैरसैंण के समर्थन में लोगों से संवाद करते हुए आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन देने की अपील की जा रही है।