500 फीट तिरंगा यात्रा: नन्हे बच्चे का सैल्यूट और वृद्धा का नमन देख सबकी आँखें भर आईं #viral #tiranga #news Narendra Modi 🔘 CMO Chhattisgarh Congress BJP - Bharatiya Janata Party
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*विशेष संपादकीय*
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*_500 फिट के तिरंगे में सिमट_*
*_गया सारा हिंदुस्तान.............._*
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https://youtu.be/_r2Ed9D41PU
*♦राष्ट्र जब अपनी स्वतंत्रता की वर्षगांठ की दहलीज पर खड़ा होता है, तब वह केवल पन्नों पर दर्ज इतिहास को याद नहीं कराता बल्कि अपनी नसों में दौड़ती देशभक्ति की उत्कट ऊर्जा भी महसूस कराता है इस बार रायगढ़ की सड़कों ने उसी शाश्वत ऊर्जा का साक्षात्कार किया जब 500 फीट लंबा तिरंगा शहर की धमनियों से होकर गुजरा, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो रायगढ़ के सीने में पूरा हिंदुस्तान एक साथ धड़क उठा हो यह कोई महज भीड़ या औपचारिक जुलूस नहीं था; यह 'राष्ट्रधर्म' का वह महा समंदर था, जिसने उम्र,वर्ग,धर्म राजनीति महिला पुरुष जात पात वृद्ध युवा बच्चों और सामाजिक विभाजन की तमाम दीवारों को एक झटके में ढहा दिया ओर सबको एक साथ समेट लिया
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*_केसरिया, सफेद और हरे_*
*_रंग में बहता जन-सैलाब_*
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नटवर स्कूल के प्रांगण से 13 अगस्त की सुबह जब यह यात्रा आरंभ हुई, तो शहर का भूगोल बदल गया। गूंजते हुए "भारत माता की जय" और "इंकलाब जिंदाबाद" के नारों में केवल आवाजें नहीं थीं, उनमें स्वतंत्रता की खातिर मर-मिटने वाले अमर शहीदों का अमर संकल्प तैर रहा था। भारत माता, बापू, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई के रूप में मुस्कुराते बच्चे इस बात का जीवंत प्रमाण थे कि हमारे महा पुरुषों के विचार आने वाली पीढ़ियों की रगों में सुरक्षित हैं संस्कार स्कूल और समाजसेवी रामचंद्र शर्मा के अटूट संकल्प ने पिछले पांच वर्षों में रायगढ़ को केवल एक दृष्टांत नहीं दिया, बल्कि राष्ट्रप्रेम का एक ऐसा 'आंदोलन' खड़ा कर दिया है, जिसकी तरंगें आज जिले की हर गली, कसबे और सुदूर गांव तक महसूस की जा रही हैं आज जिले के हर गांव में तिरंगा यात्रा का जो अलख जगा है वो इसी 5 साल कि साधना का परिणाम है पांच साल पहले जब इस यात्रा की शुरुवात हुई तो न कोई राजनीति थी ओर न कोई महत्वकांक्षा,था तो सिर्फ राष्ट्र प्रेम का जज्बा जिसने सारी समाजिक दूरियों एवं विचारधाओं को अपने में समाहित कर लिया जिससे यह आयोजन "भगीरथ की पवित्र गंगा" बन गया जिसमें डूब कर हर कोई देश के लिए "तर" जाना चाहता था।
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*_जब नन्हे हाथों का सेल्यूट व_*
*_वृद्धा का नमन अमर हो गया_*
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यह यात्रा गाड़ियों, ढोल और नारों से आगे बढ़कर 'भावनाओं' की पराकाष्ठा तक पहुंची, जब अढ़ाई साल के मासूम 'गौरवान्वित' अपने नन्हे हाथों से तिरंगे को सेल्यूट करने खड़ा हुआ। उस अढ़ाई साल के अबोध बच्चे की आंखों में चमकता गर्व और एक 60 वर्ष की वृद्धा द्वारा तिरंगे को मांगकर अपने माथे से लगा लेना—यह बताता है कि भारत की आत्मा में 'राष्ट्रध्वज' का मान सम्मान देश के लोगों के लिए क्या महत्व रखता है! एक ओर मासूम का भविष्य का विश्वास था, तो दूसरी ओर वृद्धा का अतीत के प्रति अमिट सम्मान। यही वह भारत है, जिसे कभी कोई ताकत झुका नहीं सकी।
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*_शहीदों के लहू की पावन धरा पर_*
*_दिखा 1947 का अनोखा जज्बा_*
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जब अमर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की पावन स्मृति इस यात्रा के साथ जुड़ी, तो पूरा माहौल एक पवित्र वेदना और अगाध गौरव से भर उठा । शहीद के पिता, वरिष्ठ पत्रकार सुभाष त्रिपाठी जी के वे शब्द जन-जन के दिल को छू गए कि “यह यात्रा 1947 के उस दौर की याद दिलाती है, जब स्वतंत्रता का उत्साह हर भारतीय के चेहरे पर उकेरा हुआ था।”यह जनभागीदारी इस बात का शंखनाद है कि शहीद का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता, वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी को देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है यदि सुभाष भैया के विचारों को में अपने शब्दों में कहूँ तो आज के सरकारी कार्यक्रम केवल एक परम्परा बन गए हैं उन में वो जनभागीदारी नहीं दिखती जो रामचंद्र जैसे स्वस्फूर्त आयोजनों में नजर आती है इसलिए देश प्रेम की भावना लोगो तक पहुंचानी है तो इस तरह के प्रयास ज्यादा सार्थक एवं बा मकसद साबित होते हैं
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*_रायगढ़ की माटी ने दिया साफ_*
*_संदेश............... 'राष्ट्र प्रथम"_*
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व्यापारी, युवा, महिलाएं, स्काउट कैडेट्स, पत्रकार और आम नागरिक सबने मिलकर यह सिद्ध कर दिया कि रायगढ़ की माटी में देशभक्ति का स्वर कितना मुखर और जीवंत है। विभिन्न संस्थाओं द्वारा जल-पान की सेवा और बच्चों द्वारा ताइक्वांडो व सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजन का सिर्फ़ हिस्सा नहीं थीं, वे राष्ट्र के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम भी थीं जब 500 फीट का यह तिरंगा शहर से गुजरा, तो उसने रायगढ़ के आकाश पर एक अमिट इबारत लिख दी "विचार अलग हो सकते हैं, राहें अलग हो सकती हैं,वेश भूषा ,धर्म व संप्रदाय जात पात भी अलग हो सकते हैं लेकिन बात जब तिरंगे की होगी तो पूरा भारत एक होगा।" इस ऐतिहासिक महायज्ञ को रचने के लिए रामचंद्र शर्मा, संस्कार स्कूल और 'नवनिर्माण संकल्प समिति' साधुवाद के पात्र हैं, जिन्होंने रायगढ़ की पावन धरा पर आजादी के बलिदानियों को विन्रम श्रद्धाजलि देने वाली राष्ट्रप्रेम की स्व प्रकाशित अमर ज्योति को देदीप्यमान करने का भगीरथ प्रयास किया जिसकी जितनी भी सराहना की जाए कम है अंत में इस सार्थक आयोजन के लिए.
"जय हिंद। जय भारत। जय तिरंगा"
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*🔴संपादक रमेश पत्रकार*18 अगस्त
*94252 52176* 7000654928*
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