मगध मेडिकल कॉलेज में आग से सुरक्षा का ‘मॉक ड्रिल’: अस्पताल के गार्ड से मरीजों तक, अग्निशमन विभाग ने सिखाए आपातकाल से निपटने के गुर
गया। जिले में अगलगी की घटनाओं से निपटने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला अग्निशमन विभाग की ओर से सोमवार को मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गया में मॉक ड्रिल, डेमो एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अग्निशमन पदाधिकारी ज्योति प्रकाश ने की। इस दौरान अस्पताल परिसर में तैनात सुरक्षा गार्ड, मरीजों, अस्पताल कर्मियों एवं अन्य लोगों को आग से बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दी गई।
मॉक ड्रिल के दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने अस्पताल जैसे संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले स्थान पर आग लगने की स्थिति में किस प्रकार तत्काल कार्रवाई की जाए, इसका व्यावहारिक प्रदर्शन किया। टीम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही घबराने के बजाय सबसे पहले आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना चाहिए और तत्काल अग्निशमन विभाग को सूचना देनी चाहिए। इसके साथ ही उपलब्ध अग्निशमन उपकरणों का सही तरीके से इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है।
जिला अग्निशमन पदाधिकारी ज्योति प्रकाश ने अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों को विशेष रूप से आग से बचाव एवं सुरक्षा के उपाय बताए। उन्होंने समझाया कि अस्पताल में मरीजों की स्थिति सामान्य लोगों से अलग होती है, इसलिए आग लगने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती होती है। ऐसे समय में सुरक्षा गार्ड एवं अस्पताल कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने गार्डों को आपातकालीन स्थिति में समन्वय बनाकर काम करने तथा लोगों को सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालने के तरीकों की जानकारी दी। इसके अलावा अनुग्रह नारायण कॉलेज अस्पताल, गया में भी अग्निशमन विभाग की टीम द्वारा मॉक ड्रिल एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मरीजों, अस्पताल स्टाफ एवं सिक्योरिटी स्टाफ को आग से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। विभागीय कर्मियों ने बताया कि आग लगने के प्रमुख कारणों में विद्युत शॉर्ट सर्किट, गैस सिलेंडर, ज्वलनशील पदार्थों का लापरवाही से इस्तेमाल और विद्युत उपकरणों की अनदेखी शामिल है। इसलिए अस्पताल परिसर में बिजली के उपकरणों और अग्निशमन संसाधनों की नियमित जांच जरूरी है।
कार्यक्रम में सहायक जिला अग्निशमन पदाधिकारी नवीन कुमार सिंह, सहायक अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी अमरनाथ कुमार सहित राहुल कुमार, पवन कुमार सिंह, शिवेश कुमार, राकेश कुमार, पंकज कुमार, प्रधान अग्नि अजीत यादव समेत अन्य अग्निशमन कर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
अग्निशमन विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद लोगों को यह भी बताया कि आग की छोटी घटना को नजरअंदाज करना बाद में बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसलिए शुरुआती स्तर पर ही सही कदम उठाना आवश्यक है। अस्पतालों में फायर एक्सटिंग्विशर, आपातकालीन निकासी मार्ग, अलार्म सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जानकारी प्रत्येक कर्मचारी एवं सुरक्षा कर्मी को होनी चाहिए।
अधिकारियों ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा के समय लोगों को बिना घबराए सही निर्णय लेने के लिए तैयार करना है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी जिले के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, अस्पतालों, संस्थानों एवं संवेदनशील परिसरों में आयोजित किए जाएंगे, ताकि आग से होने वाले जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
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