नरसी मेहता चरित्र और नानी बाई का मायरा लीला का मंचन
@bareillylive : श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में आयोजित रासलीला एवं भक्ति लीला में बुधवार को वृंदावन से पधारे स्वामी देवकीनंदन जी महाराज की मंडली ने भक्त नरसी मेहता चरित्र और नानी बाई का मायरा लीला का भावपूर्ण मंचन किया। लीला के दौरान कलाकारों ने भक्ति, त्याग और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का सुंदर चित्रण कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
महाराज ने बताया कि भक्त नरसी मेहता का जन्म 15वीं शताब्दी में गुजरात के भावनगर के निकट तलाजा ग्राम के प्रतिष्ठित नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह महान संत, कवि और भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे। बचपन में ही, जब नरसी मेहता लगभग पांच वर्ष के थे, उनके माता-पिता का निधन हो गया। बाद में भाभी के तानों से दुखी होकर उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में जाकर भगवान शिव की तपस्या करने लगे।
नरसी मेहता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का दर्शन कराया। इसके बाद नरसी मेहता पूर्ण रूप से कृष्ण भक्ति में लीन हो गए। वह दिनभर भजन-कीर्तन करते और समाज के सभी वर्गों के लोगों के साथ भगवान का नाम संकीर्तन करते थे। परिवार के लोगों को उनका यह व्यवहार पसंद नहीं था, इसलिए उन्होंने घर से अलग होकर अपना जीवन प्रभु भक्ति को समर्पित कर दिया।
लीला में नरसी मेहता की हुंडी का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। कुछ यात्री द्वारका यात्रा पर जा रहे थे। रास्ते में चोरों के भय के कारण उन्होंने जूनागढ़ के लोगों से हुंडी बनवाने के लिए पूछा। ग्रामीणों ने मजाक में उन्हें नरसी मेहता के पास भेज दिया। यात्रियों ने नरसी जी को 700 रुपये देकर हुंडी बनवाई। नरसी जी ने अपने आराध्य भगवान को ‘शामल शाह सेठ’ के नाम से हुंडी लिख दी। द्वारका पहुंचने पर भगवान श्रीकृष्ण ने मुनीम का रूप धारण कर यात्रियों को 700 रुपये का भुगतान कर दिया।
इसके बाद नानी बाई के मायरे की लीला दिखाई गई। नरसी मेहता की पुत्री सुलोचना की पुत्री नानी बाई का विवाह था। ससुराल पक्ष ने नरसी मेहता को परेशान करने के उद्देश्य से भात में लंबी सूची दे दी। नरसी मेहता निर्धन थे और भजन में लीन रहते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं उनके मुनीम के रूप में नानी बाई का मायरा भरा। यह देखकर सभी श्रद्धालु भावविभोर हो गए और नरसी मेहता ने भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार की।
मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि बुधवार के यजमान शैलेंद्र गुप्ता, तुषार गुप्ता, एस.के. अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, जुगल किशोर सावू, मोहन चौधरी, स्वामी सत्येंद्र मोहन शास्त्री और सी.ए. राजन विद्यार्थी रहे। कमेटी से मोहन गुप्ता, विकास शर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल, समित अग्रवाल, संजय अग्रवाल, कृष्ण अग्रवाल, निरंकार ओबेरॉय, सत्य प्रकाश ओबेरॉय, शिव कुमार सिंह, विपिन सक्सेना, रिंकू, शुभम आदि का सहयोग रहा।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को विश्राम दिवस के अवसर पर कंस वध, उग्रसेन राजतिलक और होली लीला का मंचन किया जाएगा। कार्यक्रम शाम छह बजे से रात 9:30 बजे तक आयोजित होगा।