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केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से की मुलाकात

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वंदे मातरम से तिरंगे तक, राजनीति का नया राष्ट्रभक्ति टेस्ट

छतरपुर। देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न खत्म होते ही राष्ट्रभक्ति की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान वायरल हुए वीडियो को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा इसे राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि पूरा गीत गाया गया और सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने का इशारा कर रही थीं।

इधर छतरपुर में भाजपा नेताओं ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और सोनिया गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत के दौरान इस तरह का व्यवहार देश का अपमान है और कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए।

लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर और वीडियो का मुद्दा उठा दिया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री की जेब पर लगा तिरंगा प्रतीक उल्टा दिखाई दे रहा था, जो तिरंगे के सम्मान से जुड़ा मामला है।

जब इस मुद्दे पर भाजपा नेत्री अंकिता विश्वकर्मा से सवाल किया गया तो उन्होंने पहले इसे एआई की करामात बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने एआई से फोटो और वीडियो बनाकर वायरल किए हैं। लेकिन जब पत्रकारों ने बताया कि वही तस्वीर और वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी मौजूद है, तो जवाब कुछ बदला-बदला नजर आया।

अंकिता विश्वकर्मा ने कहा, "हो सकता है गलती से उल्टा पॉकेट में लग गया हो। इसकी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री की तिरंगे का अपमान करने की कोई मंशा नहीं हो सकती।"

अब जनता भी असमंजस में है कि आखिर राष्ट्रभक्ति का पैमाना क्या है? अगर विपक्ष का इशारा राष्ट्र का अपमान है तो सत्ता पक्ष की गलती सिर्फ तकनीकी भूल कैसे बन जाती है? और अगर प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, तो फिर सोनिया गांधी की मंशा पर फैसला वीडियो देखकर कैसे सुनाया जा रहा है?

फिलहाल राजनीति में राष्ट्रभक्ति का नया सीजन शुरू हो चुका है। एक पक्ष वंदे मातरम की व्याख्या कर रहा है, दूसरा तिरंगे की दिशा नाप रहा है। जनता बस यही सोच रही है कि देशभक्ति का फैसला अब संविधान करेगा या फिर सोशल मीडिया की वायरल रीलें?

(नोट: इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांग्रेस कार्यक्रम में वंदे मातरम पूरा गाया गया था।)

वंदे मातरम से तिरंगे तक, राजनीति का नया राष्ट्रभक्ति टेस्ट छतरपुर। देश में स्वतंत्रता दिवस का जश्न खत्म होते ही राष्ट्रभक्ति की राजनीति ने नया मोड़ ले लिया है। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान वायरल हुए वीडियो को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। भाजपा इसे राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि पूरा गीत गाया गया और सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने का इशारा कर रही थीं। इधर छतरपुर में भाजपा नेताओं ने कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया और सोनिया गांधी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा नेताओं का कहना है कि राष्ट्रगीत के दौरान इस तरह का व्यवहार देश का अपमान है और कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर और वीडियो का मुद्दा उठा दिया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री की जेब पर लगा तिरंगा प्रतीक उल्टा दिखाई दे रहा था, जो तिरंगे के सम्मान से जुड़ा मामला है। जब इस मुद्दे पर भाजपा नेत्री अंकिता विश्वकर्मा से सवाल किया गया तो उन्होंने पहले इसे एआई की करामात बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने एआई से फोटो और वीडियो बनाकर वायरल किए हैं। लेकिन जब पत्रकारों ने बताया कि वही तस्वीर और वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी मौजूद है, तो जवाब कुछ बदला-बदला नजर आया। अंकिता विश्वकर्मा ने कहा, "हो सकता है गलती से उल्टा पॉकेट में लग गया हो। इसकी मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री की तिरंगे का अपमान करने की कोई मंशा नहीं हो सकती।" अब जनता भी असमंजस में है कि आखिर राष्ट्रभक्ति का पैमाना क्या है? अगर विपक्ष का इशारा राष्ट्र का अपमान है तो सत्ता पक्ष की गलती सिर्फ तकनीकी भूल कैसे बन जाती है? और अगर प्रधानमंत्री की मंशा पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, तो फिर सोनिया गांधी की मंशा पर फैसला वीडियो देखकर कैसे सुनाया जा रहा है? फिलहाल राजनीति में राष्ट्रभक्ति का नया सीजन शुरू हो चुका है। एक पक्ष वंदे मातरम की व्याख्या कर रहा है, दूसरा तिरंगे की दिशा नाप रहा है। जनता बस यही सोच रही है कि देशभक्ति का फैसला अब संविधान करेगा या फिर सोशल मीडिया की वायरल रीलें? (नोट: इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कांग्रेस कार्यक्रम में वंदे मातरम पूरा गाया गया था।)

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 16, 2026

नागपंचमी महोत्सव 2026 : दो दिवसीय आयोजन में होगा प्रतिभाओं का सम्मान, परिचय सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

छतरपुर। चौरसिया समाज, जिला छतरपुर द्वारा 16 एवं 17 अगस्त 2026 को दो दिवसीय नागपंचमी महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर समाज की ओर से आमंत्रण पत्र जारी किया गया है, जिसमें समाज के सभी परिवारों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई है।

महोत्सव का शुभारंभ 16 अगस्त, रविवार को सुबह 11 बजे से होगा। पहले दिन बच्चों की विभिन्न प्रतियोगिताएं, महिलाओं की आकर्षक प्रतियोगिताएं, सामान्य ज्ञान एवं आध्यात्मिक विषयों पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। वहीं लड़कियों के लिए फूलों की रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिता भी रखी गई है। शाम 3 बजे से विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन तथा शाम 6 बजे से सहभोज का आयोजन होगा।

दूसरे दिन 17 अगस्त, सोमवार को सुबह 10 बजे नागवेल पूजन किया जाएगा। इसके बाद अतिथियों का आगमन, दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उद्बोधन आयोजित होंगे। दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जाएगा। शाम को सामाजिक सहभोज के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

आयोजकों के अनुसार इस वर्ष भी समाज के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी, स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर निर्धारित अंकों से अधिक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ आईआईटी, नीट एवं शासकीय नौकरी में चयनित युवाओं का भी सम्मान किया जाएगा।

कार्यक्रम का आयोजन चौरसिया सत्संग भवन, श्री सांवरी मंदिर लोक कल्याण न्यास (ट्रस्ट), गायत्री मंदिर के पास, छतरपुर में किया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत बनाने की अपील की है।

नागपंचमी महोत्सव 2026 : दो दिवसीय आयोजन में होगा प्रतिभाओं का सम्मान, परिचय सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम छतरपुर। चौरसिया समाज, जिला छतरपुर द्वारा 16 एवं 17 अगस्त 2026 को दो दिवसीय नागपंचमी महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर समाज की ओर से आमंत्रण पत्र जारी किया गया है, जिसमें समाज के सभी परिवारों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई है। महोत्सव का शुभारंभ 16 अगस्त, रविवार को सुबह 11 बजे से होगा। पहले दिन बच्चों की विभिन्न प्रतियोगिताएं, महिलाओं की आकर्षक प्रतियोगिताएं, सामान्य ज्ञान एवं आध्यात्मिक विषयों पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। वहीं लड़कियों के लिए फूलों की रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिता भी रखी गई है। शाम 3 बजे से विवाह योग्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन तथा शाम 6 बजे से सहभोज का आयोजन होगा। दूसरे दिन 17 अगस्त, सोमवार को सुबह 10 बजे नागवेल पूजन किया जाएगा। इसके बाद अतिथियों का आगमन, दीप प्रज्ज्वलन, स्वागत समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उद्बोधन आयोजित होंगे। दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान किया जाएगा। शाम को सामाजिक सहभोज के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष भी समाज के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। हाईस्कूल, हायर सेकेंडरी, स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर निर्धारित अंकों से अधिक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ आईआईटी, नीट एवं शासकीय नौकरी में चयनित युवाओं का भी सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन चौरसिया सत्संग भवन, श्री सांवरी मंदिर लोक कल्याण न्यास (ट्रस्ट), गायत्री मंदिर के पास, छतरपुर में किया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों ने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत बनाने की अपील की है।

Chhatarpur Nagar, Chhatarpur | Aug 16, 2026

केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से की मुलाकात - Chhatarpur Nagar News