एक पत्रकार के तौर पर आज अपनी बात कहना जरूरी समझ रहा हूं…
मैं पत्रकार हूं और मेरा काम जनता की समस्याओं को सामने लाना है। लेकिन पत्रकार होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि मुझसे कभी कोई गलती नहीं हो सकती। इंसान हूं, गलती हो सकती है और जब अपनी गलती दिखाई देती है तो उसे स्वीकार करने में मुझे कोई संकोच नहीं है।
टिकुलियाडाड़ की सड़क और नाली से जुड़ी खबर में मुझसे एक गलती हुई। मैंने पहले पक्ष की बात रिकॉर्ड की, लेकिन खबर को आगे बढ़ाने से पहले दूसरे पक्ष का बयान नहीं लिया। मुझे स्थानीय लोगों से घर-घर जाकर और आसपास के लोगों से बातचीत करके पूरी स्थिति समझनी चाहिए थी। अगर मैंने ऐसा किया होता तो शायद यह स्थिति पैदा नहीं होती। यह मेरी गलती थी और मैंने इसे स्वीकार किया।
खबर प्रकाशित होने के बाद मैंने ग्राम प्रधान भुवर यादव जी से स्वयं मिलकर हाथ जोड़कर माफी मांगी। मेरे लिए हाथ जोड़ना कोई कमजोरी नहीं है। मेरे संस्कार मुझे यही सिखाते हैं कि अगर मेरी गलती से किसी व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो माफी मांगने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। गलती करने के बाद सीना तानकर खड़े रहना मेरे संस्कार नहीं हैं।
मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि मुझे इस बात का कोई घमंड नहीं है कि मैं किस जाति से हूं और सामने वाला किस जाति से है। मैं ब्राह्मण हूं या भुवर यादव जी यादव हैं—मेरे लिए इसका कोई महत्व नहीं है। मैं पत्रकार हूं, वह ग्राम प्रधान हैं, लेकिन इन पहचान से पहले हम दोनों इंसान हैं। इंसानियत और आपसी सम्मान सबसे ऊपर है।
मेरा उद्देश्य कभी किसी व्यक्ति को नीचा दिखाना, किसी की छवि खराब करना या किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाना नहीं रहा। सड़क की समस्या अगर है तो उसे जनता और प्रशासन के सामने रखना मेरा पत्रकारिता का काम है। लेकिन जिस व्यक्ति या जनप्रतिनिधि से जुड़ी खबर हो, उसका पक्ष सामने रखना भी उतना ही जरूरी है। आगे से मेरी कोशिश रहेगी कि हर खबर में सभी संबंधित पक्षों की बात पूरी तरह शामिल हो।
इस पूरे मामले में एक और बात कहना जरूरी है। मेरे द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो को, जबकि खबर अभी पूरी नहीं हुई थी और दूसरे पक्ष का बयान लेना बाकी था, आरके गौतम जी द्वारा मेरी अनुमति के बिना फेसबुक पर पोस्ट किया गया। मैं किसी से विवाद नहीं चाहता और न ही किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी करना चाहता हूं। मेरी सिर्फ इतनी अपेक्षा है कि किसी अधूरे वीडियो या आधी-अधूरी जानकारी को देखकर कोई निष्कर्ष न निकाला जाए।
आरके गौतम जी हों, अभिषेक यादव जी हों या कोई भी अन्य व्यक्ति—हर किसी को अपनी बात रखने और अपनी पसंद के पत्रकार से खबर बनवाने की पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन मेरी पत्रकारिता को किसी व्यक्तिगत विवाद का हिस्सा न बनाया जाए और मुझे अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
मैंने जो गलती की, उसे स्वीकार किया और माफी भी मांगी। लेकिन मैंने किसी से कोई गलत चीज नहीं ली और न ही किसी को बदनाम करने के उद्देश्य से खबर बनाई। अगर किसी को मेरी पत्रकारिता पर कोई सवाल है तो वह अपनी बात रख सकता है। हर व्यक्ति को अपनी सोच रखने का अधिकार है, लेकिन मैं किसी की सोच को जबरदस्ती नहीं बदल सकता।
मैं न किसी के दबाव में पत्रकारिता करता हूं और न किसी के खिलाफ व्यक्तिगत भावना से खबर करता हूं। जो सही होगा, उसे सही तरीके से सामने रखने की कोशिश करूंगा और जहां मेरी गलती होगी, उसे स्वीकार करने से भी पीछे नहीं हटूंगा।
मेरे लिए पत्रकारिता किसी व्यक्ति, जाति या पद से बड़ी नहीं, बल्कि सच्चाई, निष्पक्षता और जनता के विश्वास की जिम्मेदारी है।
मैं सभी से बस यही कहना चाहता हूं कि किसी भी मामले में पूरी बात जाने बिना किसी के बारे में धारणा न बनाएं और सोशल मीडिया पर ऐसी बातें आगे न बढ़ाएं जिनसे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा या सम्मान को ठेस पहुंचे।
मुझसे गलती हुई थी, मैंने स्वीकार कर ली। हाथ जोड़कर माफी मांगना मेरे संस्कार हैं, मेरी कमजोरी नहीं।
बाकी आप सभी समझदार हैं। सही और गलत का फैसला आप स्वयं कर सकते हैं।
जय श्री राम। जय श्री कृष्णा। 🙏🙏