अफ्रीका से गयाजी पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, देवघाट से विष्णुपद तक किया पिंडदान, पूर्वजों की मोक्ष कामना लेकर पहुंचे माइकल और डेविड, सनातन परंपरा से हुए प्रभावित
गया। विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर अफ्रीका से पहुंचे दो विदेशी श्रद्धालु माइकल और डेविड ने गयाजी में विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया।
दोनों श्रद्धालुओं ने देवघाट, अक्षयवट और विष्णुपद में अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान किया। उनका पिंडदान धर्मगुरु लोकनाथ गौड़ ने संपन्न कराया। डेविड को भारतीय नाम ‘देवा ऋषि दास’ के नाम से भी जाना जाता है। वे हर साल पितृपक्ष के दौरान गयाजी पहुंचते हैं।
डेविड ने कहा कि अपने पूर्वजों का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। जो व्यक्ति अपने पूर्वजों का सम्मान नहीं करता, उसे जीवन में सम्मान नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आत्मा के शाश्वत स्वरूप की बात करता है और पितरों के लिए किए जाने वाले अनुष्ठान इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
डेविड अफ्रीका से अन्य लोगों को भी गयाजी लेकर आते हैं। वे विदेशों में स्थानीय अफ्रीकी भाषा में सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। उनका कहना है कि भगवान राम और चैतन्य महाप्रभु से जुड़ी गया की धार्मिक परंपरा उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती है। गयाजी का वातावरण बेहद आध्यात्मिक और शांतिपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पिंडदान केवल पूर्वजों की शांति के लिए नहीं, बल्कि स्वयं व्यक्ति को भी मानसिक और आध्यात्मिक शांति देने वाला अनुष्ठान है।
इससे पहले पितृपक्ष में रूस, यूक्रेन, ब्राजील सहित विभिन्न देशों की 22 विदेशी महिलाओं ने भी गयाजी में पिंडदान किया था। विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था गयाजी की सनातन परंपरा की वैश्विक पहुंच को दर्शा रही है।
Gaya Town CD Block, Gaya | Oct 7, 2026